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आपके सपनों के महल पर लग सकता है झटका

डेस्क। एक बार सपनों के घरोंदे पर बिजली गिरने वाली है। कारण यह कि रेपो रेट में की जाने वाली कटौती रेपों रेट में 0.25 फीसदी की कटौती के बाद बैंकों द्वारा इसका लाभ ग्राहकों को दिए जाने की उम्मीद को झटका लगा है। जिसके बाद ग्राहकों को लुभााने में जुटे बैंकों ने होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन के लिए ब्याज दर घटाने पर लाचारी जता अपने हाथ खड़े कर दिए है। हालाकि अभी तक सिर्फ एसबीआई बैंक ही 30 लाख रुपये तक के लोन पर 0.05 फीसदी ब्याज दर कम करने का साहस जुटा सका है।
यदि सूत्रों की माने तो चार राष्ट्रीय कृत व और निजी बैंकों के अधिकारियों ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि यदि उन पर अधिक दबाव पड़ा तो वे हद से हद 0.05 या 0.10 फीसदी की राहत ही दे सकते हैं। लक्ष्मी विलास बैंक के सीईओ पार्थसारथी मुखर्जी ने इसे बैंकों का पूंजी संकट बताते हुए कहा है कि जब तक यह खत्म नहीं होता, तब तक वे बड़ी ब्याज दर में बड़ी कमी की उम्मीद नहीं कर सकते। जिसके बाद इससे ग्राहकों की ईएमआई घटने की आस टूटती नजर आ रही है। वहीं बैंकों का कहना है कि फंसे कर्ज (एनपीए) और जमा पर ज्यादा ब्याज दर के बोझ के कारण उनकी हालत पहले ही पतली है। ऐसे में लोन पर राहत फिलहाल नहीं दी जा सकती है। हालाकिं वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने भी बीते दिवस गुरुवार को कहा था कि ब्याज दर में कटौती से किसानों, मध्यमवर्ग और कारोबारियों को सस्ता कर्ज मिलेगा, जिससे आर्थिक विकास और रोजगार में भी बढ़ोतरी होगी। लेकिन उनके बयान जमीन पर उतरते नजर नहीं आ रहे है।
वहीं बैंकरों का कहना है कि जमा दर में भी कमी की जाए तो कर्ज दर में उतना लाभ ग्राहकों को दिया जा सकता है। एसबीआई ने 30 लाख रुपये तक के सभी होम लोन पर ब्याज दर में 0.05 प्रतिशत की कटौती करने की घोषणा की है। ज्यादा राहत न देने के सवाल पर बैंक चेयरमैन रजनीश कुमार मानते है कि ब्याज दर में ज्यादा कमी के लिए जमा पर भी ब्याज दर में कटौती की जरूरत है।

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