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प्रधानमंत्री ने 53वे एपिसोड के मन की बात में किया देशवासियों को संबोधित

डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात रेडियों कार्यक्रम के 53वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। उन्होने कहा कि मन की बात शुरू करते हुए आज मन भरा हुआ है। उन्होने कहा कि आज से 10 दिन पूर्व, भारत-माता ने अपने वीर सपूतों को खो दिया। इन पराक्रमी वीरों ने, हम सवा-सौ करोड़ भारतीयों की रक्षा में ख़ुद को खपा दिया। देशवासी चैन की नींद सो सकें, इसलिए, इन हमारे वीर सपूतों ने, रात-दिन एक करके रखा था। इस आतंकी हिंसा के विरोध में जो आवेग आपके और मेरे मन में है, वही भाव हर देशवासी के अंतर्मन में है और मानवता में विश्वास करने वाले विश्व के मानवतावादी समुदायों में भी है। भारत-माता की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले देश के सभी वीर सपूतों को मैं नमन करता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि यह शहादत आतंक को समूल नष्ट करने के लिए हमें निरन्तर प्रेरित करेगी। देश के सामने आयी इस चुनौती का सामना, हम सबको जातिवाद, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद और बाकि सभी मतभेदों को भुलाकर करना है ताकि आतंक के खिलाफ हमारे कदम पहले से कहीं अधिक दृढ़ हों, सशक्त हों और निर्णायक हों।
पीएम ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से आप सब से जुड़ना मेरे लिए एक अनोखा अनुभव रहा है। रेडियो के माध्यम से मैं एक तरह से करोड़ों परिवारों से हर महीने रूबरू होता हूं। चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव होता है। अगले दो महीने, हम सभी चुनाव की गहमा-गहमी में व्यस्त होगें। मैं स्वयं भी इस चुनाव में एक प्रत्याशी रहूँगा। मार्च, अप्रैल और मई, ये तीन महीने की सारी हमारी जो भावनाएं हैं उन सबको मैं चुनाव के बाद एक नए विश्वास के साथ आपके आशीर्वाद की ताकत के साथ फिर एक बार मन की बात के माध्यम से हमारी बातचीत के सिलसिले का आरम्भ करूँगा। स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान करते हुए अगली मन की बात मई महीने के आखरी रविवार को होगी।
पीएम ने कहा कि भारत की बात हो और त्यौहार की बात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। शायद ही हमारे देश में कोई दिन ऐसा नहीं होता है, जिसका महत्व ही न हो, जिसका कोई त्यौहार न हो। क्योंकि हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति की ये विरासत हमारे पास है। देशभर  में अलग-अलग शिक्षा बोर्ड अगले कुछ हफ्तों में दसवीं और बारहवीं कक्षा के बोर्ड इम्तिहान के लिए प्रक्रिया प्रारंभ करेंगें। परीक्षा देने वाले सभी विद्यार्थियों को, उनके अभिभावकों को और सभी शिक्षकों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ हैं।
उन्होने किसान चाची के अपने इलाके की 300 महिलाओं को सेल्फ हेल्प ग्रुप से जोड़ने की बात करते हुए उनकी सराहना की। उन्होने अमेरिका की टाव पोरचोन के बारे में जिक्र करते हुए बताया कि वे आज योग की जीती-जागती संस्था बन गई है। सौ वर्ष की उम्र में भी वे दुनिया भर के लोगों को योग का प्रशिक्षण दे रही हैं और अब तक डेढ़ हजार लोगों को योग शिक्षक बना चुकी हैं। वहीं, झारखण्ड में लेडी टार्जन के नाम से विख्यात जमुना टुडू ने टिम्बर माफिया और नक्सलियों से लोहा लेने का साहसिक काम किया। उन्होंने न केवल 50 हेक्टेयर जंगल को उजड़ने से बचाया बल्कि दस हजार महिलाओं को एकजुट कर पेड़ों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रेरित पद्म पुरस्कार पाने वालों में मराठवाड़ा के शब्बीर सैय्यद गौ-माता के सेवक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने जिस प्रकार अपना पूरा जीवन गौमाता की सेवा में खपा दिया ये अपने आप में अनूठा है। तो वहीं, मदुरै चिन्ना पिल्लई वही शख्सियत हैं, जिन्होंने सबसे पहले तमिलनाडु में कलन्जियम आन्दोलन के जरिए पीड़ितों और शोषितों को सशक्त करने का प्रयास किया. साथ ही समुदाय आधारित लघु वित्तीय व्यवस्था की शुरुआत की।
वहीं इस दौरान गुजरात के अब्दुल गफूर खत्री का नाम लेते हुए बताया कि उन्होंने कच्छ के पारंपरिक रोगन पेंटिंग को पुनर्जीवित करने का अद्भुत कार्य किया जो कि सराहनीय है।  वे इस दुर्लभ चित्रकारी को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का बड़ा कार्य कर रहे हैं।
उन्होने मोरारजी देसाई को याद करते हुए कहा कि हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी भाई देसाई का जन्म 29 फरवरी को हुआ था और यह दिन 4 वर्ष में एक बार ही आता है। सहज, शांतिपूर्ण व्यक्तित्व के धनी, मोरारजी भाई देश के सबसे अनुशासित नेताओं में से थे। भारतीय लोकतंत्र के महात्म्य को बनाए रखने में मोरारजी भाई देसाई के अमूल्य योगदान को, आने वाली पीढ़ियाँ हमेशा याद रखेंगे। एक बार फिर ऐसे महान नेता को मैं अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
पीएम ने कहा कि जमशेदजी टाटा सही मायने में एक दूरदृष्टा थे, जिन्होंने ना केवल भारत के भविष्य को देखा बल्कि उसकी मजबूत नींव भी रखी। वे भली-भांति जानते थे कि भारत को साइंस, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री का हब बनाना भविष्य के लिए आवश्यक है. ये उनका ही विजन था जिसके परिणामस्वरूप टाटा इंसीट्यूट आफ साइंस की स्थापना हुई जिसे अब इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कहा जाता है। यही नहीं उन्होंने टाटा स्टील जैसे कई विश्वस्तरीय संस्थानों को और उद्योगों की भी स्थापना की।
पीएम ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने 25 वर्ष की अल्प आयु में ही अपना बलिदान दे दिया। बिरसा मुंडा जैसे भारत माँ के सपूत, देश के हर भाग में हुए है। शायद हिंदुस्तान का कोई कोना ऐसा होगा कि सदियों तक चली हुई आजादी की इस जंग में, किसी ने योगदान ना दिया हो। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इनके त्याग, शौर्य और बलिदान की कहानियाँ नई पीढ़ी तक पहुँची ही नहीं. अगर, भगवान बिरसा मुंडा जैसे व्यक्तित्व ने हमें अपने अस्तित्व का बोध कराया तो जमशेदजी टाटा जैसी शख्सियत ने देश को बड़े-बड़े संस्थान दिए।
भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से न केवल राजनीतिक आजादी के लिए संघर्ष किया बल्कि आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी। अपने छोटे से जीवन में उन्होंने ये सब कर दिखाया। वंचितों और शोषितों के अंधेरे से भरे जीवन में सूरज की तरह चमक बिखेरी।
पीएम ने कहा कि इसके बाद रक्षक चक्र, सुरक्षा को प्रदर्शित करता है। इस सर्कल में घने पेड़ों की पंक्ति है। ये पेड़ सैनिकों के प्रतीक हैं और देश के नागरिकों को यह विश्वास दिलाते हुए सन्देश दे रहे हैं कि हर पहर सैनिक सीमा पर तैनात है और देशवासी सुरक्षित है। कुल मिला कर देखें तो राष्ट्रीय सैनिक स्मारक की पहचान एक ऐसे स्थान के रूप में बनेगी जहाँ लोग देश के महान शहीदों के बारे में जानकारी लेने, अपनी कृतज्ञता प्रकट करने, उन पर शोध करने के उद्देश्य से आयेंगे।
अमर चक्र की लौ, शहीद सैनिक की अमरता का प्रतीक है। दूसरा सर्कल वीरता चक्र का है जो सैनिकों के साहस और बहादुरी को प्रदर्शित करता है। यह एक ऐसी गैलरी है जहां दीवारों पर सैनिकों की बहादुरी के कारनामों को उकेरा गया है। इसके बाद, त्याग चक्र है यह सर्कल सैनिकों के बलिदान को प्रदर्शित करता है। इसमें देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखे गए हैं। पीएम ने कहा कि इंडिया गेट और अमर जवान ज्योति के पास ही ये नया स्मारक बनाया गया है। मुझे विश्वास है ये देशवासियों के लिए राष्ट्रीय सैनिक स्मारक जाना किसी तीर्थ स्थल जाने के समान होगा. यह स्मारक स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है।

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