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निवेश के समय रखे इन बातो का ध्यान, अन्यथा पड़ सकता है मंहगा

डेस्क। अधिकांशतः हम निवेश करते समय छोटी छोटी किंतु बड़ी भूल कर जाते हैं। यही भूल आगे चल कर हमारे लिए जोखिम बन जाती है। अक्सर हम किसी प्रकार के निवेश या इंश्योरेंस खरीदने से पहले हम अपने परिचितों से सलाह लेते हैं। और यह शायद बेहद जरूरी भी लगता है। हम इस समय यह बेहद अहम मानते है कि हमारे परिचित व रिश्तेदार हमे सही सलाह देगें। उनकी सलाह पर अपनी जरूरतों का ध्यान दिए इसे बगैर इसे खरीद लेते हैं। लेकिन कुछ मामले ऐसे भी होते है कि हमारे परिचित व रिश्तेदार हमारी भूल के बाद ही अनुभव ले पाते है। ऐसे में अपने परिचितों की सलाह लेने की तुलना में आप वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह या ऑनलाइन जानकारी लेना ज्यादा समझदारी मानी जा सकती है। वहीं बाजार में लगातार नजर बनाए रखना भी बेहद जरूरी मान सकते है। आज टर्म प्लान भी ऐसा ही एक जरूरी निवेश है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमें कई कंपनियों से अलग-अलग टर्म इंश्योरेंस लेने के फेर में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि ऐसी समग्र पॉलिसी पर ध्यान दें जो आपकी जरूरतों पर खरी उतरती हो।

ज्यादा पॉलिसी किसी भी सूरत में लाभदायक नहीं 
अलग कंपनियों से टर्म प्लान अक्सर लोग इसलिए ले लेते हैं, जिससे कि अगर उनका एक क्लेम रद्द हो जाए तो कम से कम दूसरा पास हो जाएगा। चलों एक बार इस अवधारणा को मान भी लिया तो भी जरा सोचिए कि कोई एक करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस लेने की बजाय 25-25 लाख रुपये के चार प्लान लेता है या 50-50 लाख के दो प्लान लेता है। तब उसे यह समझना चाहिए कि अगर किसी कारण से एक क्लेम खारिज होता है, तो वही कारण दूसरे पर भी लागू होता है। यानी कि यह कदम आपके लिए जोखिम भरा हो सकता है।
 
टर्म इंश्योरेंस लेना क्या लाभदाय है
अब आप यदि टर्म एंश्योरेंस पर ध्यान लगा रहे है तो फिर कुछ बारीकी इस पर भी जान लीजिए। अगर आपका परिवार (माता-पिता, बच्चे और पत्नी) आप पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं तो टर्म प्लान लेना जरूरी है। नौकरी लगने के बाद तो टर्म इंश्योरेंस लेना बेहतर होता है। आप प्रीमियम भुगतान में भी काफी समर्थ हो जाते हैं। समय के साथ इसका कवर चाहें तो बढ़ा सकते हैं।
 
पालिसी में लाइफ टर्म कितना हो
आपकों पारिवारिक जरूरतों और आय को देखते हुए पर्याप्त कवरेज वाली पॉलिसी लेनी चाहिए। लाइफ टर्म कवर कम से कम सालाना आय के 15 से 20 गुना तक होना चाहिए।

ध्यान रखें, यह कोई निवेश योजना नहीं है
टर्म इंश्योरेंस के मामले में आप अच्छी तरह से जान ले कि यह निवेश नहीं है। निवेश के मामले में विशेषज्ञों की राय रहती है कि थोड़ा पैसा सुरक्षित योजनाओं में, थोड़ा इक्विटी और थोड़ा सेवानिवृत्ति की योजना में लगाना चाहिए। टर्म प्लान के दौरान अगर दुर्भाग्यवश बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है तो कवर की पूरी राशि उसके नॉमिनी को मिलती है। यानि कि इस मामले में पैसे को लगाते समय पूरी तरह से छानबीन अवश्य कर लें।

निवेश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
निवेश के दौरान सस्ते के चक्कर में किसी भी कंपनी की पॉलिसी न लें। पॉलिसी में बीमारी या आदतों की सही जानकारी दें। परिवार से जुड़ी बातों को भी न छिपाएं। टर्म प्लान लेते समय इससे जुड़ी शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और पूरी स्पष्टता के बाद ही इसे खरीदें। दुर्घटना या गंभीर बीमारियां अगर इसमें कवर नहीं हैं तो अलग से राइडर भी लिया जा सकता है। हालांकि इसके लिए कुछ ज्यादा प्रीमियम चुकाना होगा। 

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