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अधिवक्ता को जातिसूचक शब्दों से किया अपमानित

...रिपोर्ट:रत्नम चौरसिया, एडवोकेट।
पुरवा/उन्नाव। मानव सभ्यता के हजारों साल बाद भी जातियां ही पूजी जा रही हैं। गुण व कर्मों की पूजा करने की बात बस कहावतों तक सीमित रह गयी है। एक ऐसा ही मामला शुक्रवार को पुरवा रजिस्ट्रार कार्यालय में तब प्रकाश में आया जब एक दलित जाति के अधिवक्ता को जाति सूचक अपशब्द कहकर महिला अधिकारी ने कार्यालय के बाहर कर दिया।
प्राप्त विवरण के अनुसार तहसील सब रजिस्ट्रार रिचा शुक्ला के ऊपर रिश्वत लेने के मामले में आरोप लगे हैं। साथ ही दलित अधिवक्ता को जाति सूचक अपशब्द कहने का आरोप भी लगा है। इस आरोप में सब रजिस्ट्रार रिचा शुक्ला के साथ लिपिक हरि किशोर शुक्ला भी सम्मिलित हैं। वादी कफील खान पुत्र लतीफ खान निवासी ग्राम पारा के अनुसार दिनांक 18 जनवरी 2019 को अधिवक्ता राजकिशोर के माध्यम से बैनामा तैयार कर सब रजिस्ट्रार कार्यालय पुरवा गया, तो वहां पर कहा गया कि तुमने स्टांप कम लगाया है, या तो ₹5000 की स्टांप और लगाओ या फिर 5000 हमें दे दो। अधिवक्ता का कहना है स्टांप नियमानुसार सही लगे हुए थे। इसलिए रिश्वत देने से हमने इंकार कर दिया। कफील का कहना है कि उसके सामने ही उसके वकील राज किशोर को जातिसूचक गाली दी गई, जिसमें रिचा शुक्ला ने कहा कि जाति का पासी कानून का जानकार कब से बन गया? मेरे ऑफिस से निकल जा नहीं तो धक्के देकर बाहर कर दूंगी।  
आपको बताते चलें कि एक वर्ष पहले भी रिचा शुक्ला ने अधिवक्ता राजकिशोर के बैनामे को करने से मना कर दिया गया था। उसके बाद वकीलों ने लामबंदी की, एसडीएम और डीएम को ज्ञापन दिया, तब जाकर बैनामा हुआ था। सब रजिस्ट्रार कार्यालय में हो रहे भ्रष्टाचार पर वकीलों ने पोल भी खोली थी। मगर सवाल यह है कि सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों की  जांच क्यों नहीं करवा रही?  जिलाधिकारी महोदय भी कार्यवाही करने से डर क्यों रहे हैं?  फिलहाल यह जांच का विषय है। देखना यह होगा इस मामले में क्या जांच होती है और क्या कार्यवाही? यह आम जनश्रुति है कि सब रजिस्ट्रार कार्यालय अवैध धन उगाही का अड्डा है। इस सम्बन्ध में जब बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश यादव से पूछा गया तो, उन्होंने कहा कि साथी अधिवक्ता राजकिशोर की शिकायत उचित है। इस सम्बन्ध में ठोस रणनीति बनाकर उप निबन्धन अधिकारी के विरोध में उचित कदम उठाया जाएगा।

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