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दो चार वर्षों में हिंन्दू धर्मांधता बढ़ी- ज्ञानेंद्र


राष्ट्रीय मानवीय एकता सम्मेलन से कुमार दिलीप की विशेष रिपोर्ट


नागपुर। साम्प्रदायिक ताकतें भाषा, क्षेत्र, जाति के नाम पर, अफवाह और झूठ बोलकर समाज को बांट रही है और उनका प्रतिरोध ना के बराबर हो रहा है। आज के निराशावादी दौर में मानवीय एकता की पक्षधर फोर्स प्रकाश बनकर समाज को जगाने का काम करेगी। इस पहल के लिए तरह-तरह के प्लेटफार्म पर काम करने वाले लोगों का एक समुच्चय बनना चाहिए।
यह बात शुक्रवार को विनोबा विचार केंद्र, नागपुर में सातवें राष्ट्रीय मानवीय एकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कही। सम्मेलन की पृष्ठभूमि पर जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी (ज•स•वा•) के संगठक ज्ञानेंद्र ने मानवीय एकता संगठन के इस आयोजन के परिप्रेक्ष्य के विषय में बताया। उन्होंने सम्मलेन को संबोधित करते हुए कहा कि गत दो चार वर्षों में हिंन्दू धर्मांधता बढ़ी है। इसमें मीडिया की भूमिका भी रही है। इस पर मंथन करने की जरूरत है।
वक्ता वासंती दिघे ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि आज के जिस माहौल में हम आये हैं। वहां तरह-तरह की अदृश्य शक्तियां प्रभावी हुई है।  साम्प्रदायिकता का दायरा बढ़ा है। पाखंड बढ़ा, अल्पसंख्यक, दलितों, शोषितों नवयुवकों और महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं। गो रक्षा कानून, गो भक्तों को एक तरीके से हथियार की तरह मिल गया है। जिसमें इंसान के जान की कीमत गौमाता से कम हुई है। पूंजीवादी मीडिया से संजीदा पत्रकारों को मुख्यधारा से हटाया जा रहा है। शैक्षणिक संस्थानों में रोहित वेमुला, कन्हैया कुमार को हटाकर जिन्ना की तस्वीर को लेकर कोरी बहसें की जा रही हैं।
वर्धा से आए अमीर अली अजानी ने कहा कि निस्संदेह 2014 से 19 के बीच हालात इतने खराब हुए हैं कि हम अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। हमने मीसा और अकाल का वक्त देखा है। लेकिन रोंगटे खड़े और जुबां खामोश कर देने वाली घटनाएं बढ़ी है। एक तरीके से साम्प्रदायिक ताकतों को मौन समर्थन है। यह आगे आने वाली जेनेरेशन के लिए गंभीर चुनौती है। इसके लिए गहरे चिंतन की जरूरत है। साइकिल यात्रा, पदयात्रा, सत्याग्रह गए दिनों की बात है । हमें अपने लोगों को मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए।
दारुबन्दी के विरुद्ध उल्लेखनीय कार्य करने वाली सामाजिक कार्यकर्ती यामिनी चौधरी ने कहा कि मैं छात्र युवा संघर्ष वाहिनी से हूं। मैं जेपी का यह कथन हमेशा ध्यान में रखती हूं कि दमन के खिलाफ झुकना कायरता होती है।उन्होंने व्यक्तिवादी मिजाज पर तंज करते हुए कहा कि व्यक्ति पूजा से कुछ नहीं होता हमें संविधान का धागा पकड़कर आगे बढ़ना चाहिए। देश में प्रतिगामी शक्तियां बढ़ी हैं । इस हालात से उबरने के लिए हमें एकजुट होना होगा। हमें लाल झंडा, नीला झंडा और तिरंगा  झंडे को लेकर आगे जाना होगा।
इस मौके पर उन्नाव उत्तर प्रदेश से आए कुमार दिनेश प्रियमन की पुस्तिका मानवीय एकता की अमर प्रेरणा : गणेश शंकर विद्यार्थी पुस्तिका का लोकार्पण किया गया। किताब की अंतर्वस्तु पर लेखक दिनेश प्रियमन, पुस्तक की प्रेरणा पर जयंत दीवाण और पुस्तिका के प्रकाशक सर्व सेवा संघ के अरविंद अंजुम ने विस्तार से टिपण्णी की।  कुमार दिलीप, राजकुमार दिगाडे, देवेंद्र और कुमार दिनेश प्रियमन ने क्रांतिकारी गीतों को गाकर शमां बांध दिया। संचालन रत्ना ढो रे ने किया।
द्वितीय सत्र में मानवीय एकता की सामयिक एवं दीर्घकालीन सामूहिक चुनौतियां विषय पर आधार वक्तव्य कुमार कलानंद मणि व च0 अ0 प्रियदर्शी ने अपने गंभीर भाषण दिए। इन भाषणों के उपरांत चार समूहों में चर्चा की गई जिसमें मानवीय एकता का चिन्हांकन किया गया। झारखण्ड से आए मंथन, यूपी से आए दिनेश प्रियमन, महाराष्ट्र की यामिनी चौधरी व धनंजय आदित्य ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन रुबीना पटेल ने किया।  


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