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शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही फिर आई सामने


..रिपोर्ट- रत्नम चौरसिया, एडवोकेट ।
पुरवा/उन्नाव। संसार के सबसे निरीह और असहाय प्राणी को देखना हो तो आ जाइए उत्तर प्रदेश के  बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षक के पास । विभागीय अधिकारियों समेत किसी व्यक्ति, गांव वाला, प्रधान, ब्लाक व तहसील कर्मचारी सभी बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षकों पर अपना जोर आजमाते रहते हैं। इसका एक और ताजा उदाहरण ग्राम हीराखेड़ा मजरा लखमदेमऊ के प्राथमिक विद्यालय में उस वक्त देखने को मिला जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इंचार्ज अध्यापक को निलंबित कर दिया। 
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय व खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पुरवा के आर्थिक भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए गुरुवार को आनन-फानन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बी के शर्मा ने इंचार्ज अध्यापक को निलंबित कर दिया। जब मूल रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करने वाले एनपीआरसी, एबीआरसी व खण्ड शिक्षा अधिकारी प्रबल दोषी है। विद्यालय के निर्माण से लेकर मरम्मत कार्य तक में भयंकर रूप से आर्थिक भ्रष्टाचार होता है। इसमें खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पूरी तरीके से संलग्न रहता है। किन्तु स्वयं पर कोई आंच न आए इसके लिए प्रायः अध्यापक को ही बलि का बकरा बनाया जाता रहा है। 
आपको अवगत करा दे कि बृहस्पतिवार को प्राथमिक विद्यालय हीराखेड़ा मजरा लखमदेमऊ में खेलते समय गेट व बाउण्ड्रीवाल का कुछ हिस्सा गिर गया  था। उसकी चपेट में आए कक्षा चार के दो छात्र विशाल पुत्र ओमप्रकाश उम्र 7 वर्ष एवं परमेश पुत्र विनोद गम्भीर रूप से घायल हो गए। परमेश को तो जिला अस्पताल रिफर कर दिया गया और बाद में उसे हैलेट के लिए भेज दिया। यह घटना लगभग 9:30 बजे सुबह की बताई जा रही है। जबकि जनपद में परिषदीय विद्यालयों के खुलने का समय 10 बजे का है, तो फिर अध्यापक कैसे दोषी हुआ। प्रकाश में यह भी सामने आया है कि, इस घटना के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सम्पूर्ण जनपद के विद्यालय भवनों की स्थिति की सूचना अपने अधीनस्थों से मांगी है। प्रश्न यह है कि आखिर घटना के बाद ही प्रशासन की नींद क्यों टूटती है? इसके पहले जब निरीक्षण के नाम पर अवैध वसूली की जाती है, तब उनकी आत्मा उन्हें नहीं धिक्कारती। 
पुरवा के खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय व बीईओ प्रवीण दीक्षित की कार्यशैली पर काफी दिनों से प्रश्न चिन्ह लग रहा है। इस क्षेत्र में आज भी गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय धड़ल्ले से संचालित है। पिछली बार जब इस पर शासन का चाबुक चला तो विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से रातों रात कुछ विद्यालयों को मदरसा की मान्यता मिल जाने की बात प्रकाश में आई। एक बार पुनः क्षेत्र में अवैध विद्यालयों की दुकाने इन्हीं लोगों की मेहरबानी से सजने लगी हैं।

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