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थाना गंगाघाट की पुलिस कहीं जरायम अपराधों की जड़ तो नहीं

उन्नाव। प्रदेश में बढ़ते जरायम अपराध पर अकुंश लगाने में असमर्थ पुलिस उल्टे पत्रकारिता पर दबाव बनाने में तुली हुई है। जब कोई पत्रकार किसी अपराध के सिलसिले में पुलिस अधिकारियों से जानकारी लेने की कोशिश भी करते हैं तो शीर्ष व चहेते पत्रकारों को छोड़ अमूमन पत्रकारों को अधिकारी दहलीज से टरकाने में जुटे रहते है। जिससे गरीब व बेबस आम आदमी को न्याय एक दूर की कौड़ी बन कर रह गया है।
डीजीपी उत्तर प्रदेश के द्वारा प्रदेश में बढ़े अपराधों पर लगाम लगाने के लिए उनको संज्ञान में लाने के लिए पुलिस को निर्देशित किया था कि पुलिस त्वरित कारवाई करते हुए अपराधों पर अकुंश लगाने के साथ्ज्ञ पत्रकारों से कुछ भी न छुपाएं व सारे वारदातों व मामलों की पूर्ण जानकारी पत्रकारों को उपलब्ध कराए ताकि प्रदेश में बढ़े अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सके। लेकिन आदेश पूरी तरह से हवा हवाई हो गया है।
यही कुछ मामला उन्नाव जिले के गंगाघाट कोतवाली का है। जहाॅ की पुलिस इस कदर बेलगाम हो गई है कि डीजीपी के निर्देश उसके लिए आम निर्देश जैसे हो गए है। हालात यह है कि पुलिस महकमा न ही किसी भी मामले की पूर्ण जानकारी कोतवाली पहुंचने वाले पत्रकारों को देना किसी भी सूरत में जरूरी नही समझा है। यहाँ की पुलिस तो सिर्फ अपने उन चहेते पत्रकारों को ही उपलब्ध कराती है जो सिर्फ इनके पक्ष की ही बात लिख, संगीन अपराधिक मामलों पर पर्दा डालने का काम करते हैं। अधिकारी अकसर पत्रकारों को वही बताते और दिखाने की कोशिश करते हैं जो वे दिखना चाहते है।
कोतवाली गंगाघाट का आलम तो यह है कि इस क्षेत्र में अपराधी व अपराध चरमसीमा पर व्याप्त हो चला है। जितने भी सट्टा, चरस, गांजा , जुआं , देहव्यापार जैसे अनैतिक कार्य है वो सब कोतवाली क्षेत्र में खुलेआम संचालित होते है। जो स्पष्ट रूप से इशारा करता है कि ये सारे अवैध कार्य बिना पुलिस की रजामंदी व शह के बिना इस क्षेत्र में एक दिन भी नहीं संचालित हो सकते हैं।
अब अगर कोई पत्रकार अपनी स्वतंत्र लेखनी से इन अवैध व्यापारों व पुलिस की अवैध वसूली के खिलाफ अपनी खबर लिखता है तो गंगाघाट पुलिस उनके कृत्यों का विरोध करने वाले उन पत्रकारों के खिलाफ अपशब्द बोलने से भी बाज नहीं आते हैं। उल्टा उस पत्रकार पर ही उन कार्यो से वसूली न मिलने की बात बोल उसको ही बदनाम करा उसकी कलम को रोकने का काम करती है। वजह यह भी है कि कोतवाली गंगाघाट कुछ चुनिंदा बड़े बैनरों के दलाल पत्रकारों के इशारे पर संचालित होती है । जिस कारण है कि कोतवाली क्षेत्र में संचालित होने वाले अवैध कभी भी किसी को भी नहीं नजर नहीं आते। ऐसे पत्रकारों की सांठगांठ साफ रूप से कोतवाली के अन्दर कभी भी खुली निगाहों से देखी जा सकती है। वैसे भी कोतवाली गंगाघाट को पुलिस रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा कमाई वाली कोतवाली माना गया है। सूत्रों का मानना है कि हो न हो यहाँ से होने वाली कमाई का हिस्सा जिले में बैठे कुछ बड़े आलाधिकारियों तक भी उसका हिस्सा जरूर पहुंचता है। शायद तभी यह कारण है कि जिले में बैठे जिम्मेदार उच्चाधिकारी भी यदि भ्रष्ट अधिकारियो पर किसी प्रकार की कोई कड़ी कार्यवाही करना उचित नहीं समझते हैै।

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