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कितना कमजोर है वह कि मात्र जीवन की रचनाकार से ही अशुद्ध हो गया


सुधीर कुमार जाटव एक बेहतर कलम कार हैं। पाखंडवादिता पर सीधे चोट करने वाले सुधीर की कलम बिना किसी लच्छेदार बात रखने के दूषित विचार धारा वालों पर सीधे प्रहार करती है।
डेस्क। बीते कुछ दिन ही पूर्व शबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं ने प्रवेश किया। उनका प्रवेश क्या हो गया, मानों आसमान ही टूट गया। कल तक बेहद सुरक्षित रहे भगवान आज अशुद्ध हो गए। मामला ही कुछ ऐसा था, कि किसी मंदिर में किसी तथाकथित अछूत इंसान ने प्रवेश किया, भगवान फिर अपवित्र हो गया। अब वह कितना कमजोर है कि मात्र जाने भर से कमजोर असहाय सा थर थर काॅपने लगता है। वह भगवान जो दुनिया में जीवन का श्रृजन करने मनुष्य को जनने वाली स्त्री के प्रवेश मात्र से अपवित्र हो जाता है। जिसने दुनिया को जना है उस स्त्री के दूर से देखने मात्र से भला कोई कैसे अपवित्र हो सकता है? अगर महिला अपवित्र है तो फिर दुनिया में कोई भी पवित्र नही है। सभी अपवित्र हैं क्योंकि सबने उसी महिला की कोंख से जन्म लिया है। जो महिला को अपवित्र मानते हैं वो महिलाओं के ही नही सृष्टि के भी विरोधी हैं । जब उन्होंने अपनी माता की योनि से जन्म लिया था वो तब अपवित्र क्यों नही हुए? जब वो औलाद जनने के लिए अपनी हवस को मिटाने के लिए स्त्री के पास गए वो तब अपवित्र क्यों नहीं हुए। वो स्त्री से जन्म लेने पर स्त्री के साथ सोने से अपवित्र नही हुए लेकिन एक तथाकथित सर्वशक्तिमान ईश्वर उस स्त्री के देखने मात्र से ही अपवित्र हो गया। कितना कमजोर है वो ईश्वर। कितना बेबस है वो ईश्वर । हमको ऐसा लाचार बेबस ईश्वर नही चाहिए जो हवा की तरह अशुद्ध हो गया। अशुद्ध हवा जीवन के लिए स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होता है इसी तरह ये अशुद्ध ईश्वर भी जीवन और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

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