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ठण्ड की चपेट में आ आवासहीन गरीब की मौत,सरकारी अमला सच छुपाने में जुटा

सफीपुर/उन्नाव।  सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में  इंदिरा आवास, लोहिया आवास, प्रधानमंत्री आवास, मुख्यमंत्री आवास मात्र कागजों पर ही फल फूल रहें है। आज भी गरीबों को छत का बंदोबस्त प्रशासनिक लापरवाही के चलते नहीं हो पाया है।  सरकारी मशीनरी गरीबो के लिए बानी महत्वाकांक्षी योजना आशियाने की उम्मीदों पर पलीता लगाने में जुटी हुई है। सरकारी लापरवाही कहा जाए या कुछ और, सरकारी अमले को सुविधा शुल्क न दे पाने से आवास के वंचित हुए एक गरीब की ठण्ड से मौत हो गई। मामला  सफीपुर के गांव ककरौरा का है। जहा एक गरीब सरकारी आवास पाने के लिए आठ वर्ष दौड़ता रहा, मगर हर बार पात्रता सूची से बाहर कर दिया गया। कच्ची दीवार पर तिरपाल डालकर परिवार के साथ गुजर करने वाले इस गरीब की मौत हो गई। परिजन के मुताबिक ठंड लगने से वह बीमार चल रहा था। गरीबी भी ऐसी कि आर्थिक तंगी के चलते अंतिम संस्कार भी समय से नहीं हो सका। मौत के 48 घंटे बाद भाई के लुधियाना से आने पर शुक्रवार को अंतिम संस्कार हुआ। उधर, अनदेखी उजागर होने पर जिम्मेदार अब सफाई देने लगे हैं।
बदनसीबी की यह कहानी शिवसागर (55) की है जो परिवार के साथ अत्यंत गरीबी में जीवन यापन करता था। गांव में आठ वर्ष पहले कच्चा मकान गिर जाने के बाद से तिरपाल डालकर परिवार रह रहा है। मृतक की पत्नी ममता ने बताया की पिछले आठ साल से आवास के लिए उनके पति ग्राम प्रधान और ब्लाक के चक्कर लगा रहे थे। हर बार अश्वासन ही मिलता रहा। पांच साल पूर्व बड़ी बेटी की शादी में अपनी डेढ़ बीघा जमीन गिरवी रख दी थी। जिसके बाद परिवार को खाने के लाले पड़ गए। पति मजदूरी कर बच्चों का पेट पालने लगा था। तीन दिसंबर को वह खेत पर मजदूरी करने गए थे, जहां ठंड लगने बीमार हो गए। पहले सीएचसी, फिर कस्बे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आर्थिक हालात ठीक न होने पर परिवार अस्पताल का खर्च नही उठा सका और पांच दिसंबर को घर ले गए। छह दिसंबर की सुबह शिवसागर की मौत हो गई। दाह संस्कार के पैसे न होने के कारण परिजन प्रशासन की ओर से मदद की राह ताकते रहे। बीते  शुक्रवार को जब मामला चर्चां में आया तो प्रशासनिक अमला हरकत में आया। सफीपुर तहसीलदार सुरेंद्र पुलिस के साथ गांव पहुंचे। परिवार के सदस्यों को परिवारिक लाभ योजना एवं मुख्यमंत्री कोष से आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिला अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। वैसे प्रशासनिक अमला यह बताने से नहीं चूका कि गरीब की बीमारी से मौत हुई है। वैसे भी उसे नई आवास सूची में नाम शामिल कर लिया गया था। जिसके बाद कुछ ही समय में उसे आवास भी मिल ही जाता। अब  पूर्व में आवास न मिलने के कारणों की जांच कराये जाने के आदेश हो चुके हैं। तो वहीँ पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाए जाने की अधिकारियों ने बात कही है।
बात कुछ भी हो सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में  इंदिरा आवास, लोहिया आवास, प्रधानमंत्री आवास, मुख्यमंत्री आवास से वंचित गरीब अब लौट कर नहीं आने वाला। 
 अजय सिंह  एडवोकेट : रिपोर्ट