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एडीओ द्वारा प्रदत्त आवास पर ग्राम सचिव ने नकारा, लाभार्थी लगा रहा अधिकारियों के चक्कर

पीलीभीत। आवास को लेकर नया मामला प्रकाश में आने के बाद विभागीय स्तर पर हड़ंकंप मच गया है। आवासीय मामले में जिसे एडीओ ने पात्र माना, उसे ही सचिव ने टकरा दिया। सचिव ने मामले की नजाकत तक न समझी। जिस पर निराश हो पीड़ित अधिकारियों की चैखट के चक्कर लगाते फिर रहे है।
मामला है। जनपद के बिलसंडा  विकास खंड का। जहाॅ के एडीओ ने आवास का पात्र मान कर राजकिशोर निवासी करेली को आवास देने क निर्देश जारी कर दिए। लेकिन जब उसकी फाइल सचिव के पास पहुंची तो उसने मामले की गंभीरता न समझ उसको टरका दिया।
बताते चले कि प्रदेश की सरकार भले ही हर गरीब को आवास का लाभ देना चाहती है। लेकिन जिम्मेदार भूमिका निभाने वाले सचिवों की कार्यशैली के बिगड़े स्वरूप ने उसमें पलीता लगाने में कोई कसर छोड़ना नही चाहते है। उनकी वजह से ही बिलसंडा में सरकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर न उतर कर हवा में ही दम तोड़ रही हैं। करेली गांव में एडीओ कृषि चतुर्भुज बाजपेई द्वारा चिन्हित राजकिशोर को आवास के लिए पात्र बताने के बाद भी गांव के सचिव रोहिताश जयसवाल द्वारा आवास देने से आनाकानी करना बड़े स्तर की विभागीय खामी को दर्शाता है।  प्रशासकीय तौर तरीके पर निगाह फेरी जाए तो बेहद प्रश्न उभर कर आ जाते है। मामले की गंभीरता का आंकलन इस बात से लगाया जा सकता है कि एडीओ  की जांच रिपोर्ट के 22 दिन बाद भी सचिव ने आवास लाभार्थी की फाइल तक तैयार नहीं की है। वहीं न्याय की आस में पीड़ित ने जिलाधिकारी से मिल मामले की शिकायत भी की है।
रिपोर्ट- जोगेन्द सिंह
 

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