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मुलायम खेमें में आशीर्वाद के बीच कौन किसके साथ

विचारक: आलोक (मयंक आलोक)
डेस्क। तीन प्रदेशो में आए चुनाव के नतीजो ने धूम मचा रखी है। केंद्र व प्रदेश के हुक्मरानों की नाकामी का खामियाजा सत्तारूढ़ प्रदेश सरकारों ने उठा ही लिया है। एक तरफ जहाॅ कहीं विभिन्न न्यूज डिवेट में सत्ताधारी नेताओं के बड़बोलेपन से जनता खींझ चुकी थी, तो वहीं दूसरी तरफ जनता के पास अधिक विकल्प भी मौजूद नहीं थे।
पूरे परिद्रश्य में चुनाव के अतिरिक्त चर्चा में यदि पारिवारिक मुद्दा रहा है तो मुलायम कुनबा। वहाॅ पर पारिवारिक प्रतिद्वदों में जलेबी सी लगने वाली त्रिकोणीय इन दिनों उत्तर प्रदेश की जनता बड़े मजे से चख रही है। इसी चर्चा के बीच शहर गाॅव गलियों में प्रदेशों के नतीजों के आने के बाद एक ही चर्चा चल रही है। राजनीतिक गपशप में एक बार फिर मुलायम सिंह के पारिवारिक मामलो को लेकर चर्चाए मौसमी ठंड में गर्मी लाने के प्रयास में सफल दिख रही है। लोंगों के बीच सवाल उठ रहा है कि कौन किसके साथ है और कौन किस का विरोध कर रहा है?   
 
बात कुछ भी हो मामला तो बिलकुल साफ है। नेता जी(मुलायम सिंह यादव) अखिलेश के साथ है, लेकिन शिवपाल के खिलाफ नहीं हैं। तो वहीं पर शिवपाल और अखिलेश दोंनो एक दूसरे की खिलाफ़त कर रहे है। लेकिन दोनों अक्षय से प्यार करते हैं लेकिन अक्षय पापा के साथ है। तेजप्रताप का सिंपल है। वे शिवपाल की इज्जत करते हैं लेकिन अखिलेश के साथ हैं। प्रतीक अखिलेश की इज्जत करते हैं लेकिन पापा के साथ हैं। अपर्णा योगी के साथ है लेकिन मुलायम सिंह की इज्जत करतीं हैं लेकिन उनके बेटे अखिलेश को नापसंद करती हैं। रामगोपाल शिवपाल के खिलाफ हैं, लेकिन सरकार से डरते हैं। वे फिलहाल अखिलेश के साथ है। इसी तरह से डिंपल का राजनैतिक दृष्टिकोण भी बेहद सिंपल है, यानि कि वे पति के साथ हैं। जहाँ अखिलेश और नेताजी हैं, धर्मेंद्र वहीं है। लेकिन वे इज्जत सबकी करते हैं। शिवपाल बीजेपी के साथ हैं लेकिन सेकुलर मोर्चा चलाते हैं और मुलायम सिंह का आशीर्वाद उनके साथ है।
है न बेहद सरल सी बात! लेकिन लोग हैं कि अब भी समझ नहीं पा रहें हैं। आखिर मामला भी तो पब्लिकली इंट्रेस्टिंग होता जा रहा है।

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