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रूस की जमीन को मिला भागीरथ, बहाई सद्भाव की पावन गंगा

अपनी माँ स्व. धनराजी व पिता स्व. रामकरण के जीवन संघर्षों को प्रेरणाश्रोत मानने वाले डा. रामेश्वर सिंह की विदेशी जमीन पर सफलता का विशेष किरदार उनकी जीवनसंगिनी  ने निभाया है। 
 डेस्क/दुनिया। भारत से दूर रह कर भी डाॅ. रामेश्वर सिंह अपनों को नहीं भूल सके है। यही वजह है कि मास्कों से भी भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार में वे सदैव तत्पर रहते है।  डाॅ. रामेश्वर सिंह के द्वारा स्थापित व मित्रता को पैगाम देता रूसी-भारतीय मैत्री संघ ‘दिशा, अपने उद्देश्यों की प्राप्ति की ओर अग्रसर होता दिख रहा है।

साहित्य से समाज की नब्ज को पहचानना, अतीत और वर्तमान दोनों के बीच एकात्मकता का भाव केवल और केवल साहित्य की पगड़ंड़ी से ही जोड़ा जा सकता है। साहित्य की अविरल धारा हमें वर्तमान से अतीत और कभी कभी भविष्य का भी वरण करने का आभास देती है। प्रवास में रहते हुए अनेक भारतीय लोगों ने अपने वतन से दूर अपनी माटी की महक को वास्तविकता या कल्पना में महसूस जरूर किया होगा। उन्हीं में से एक डाॅ. रामेश्वर सिंह को यह टीस यदा-कदा लगा करती थी। उन्होने दूर रह कर भी अपने देश व हमवतन के लोगों के लिए कुछ करने का मन बनाया। फिर लग गए उद्देश्यों की पूर्ति में। उनके प्रयासों के चलते व उनके अनुभव के आधार पर सन 2010 में रूसी-भारतीय मैत्री संघ ‘दिशा’ की स्थापना की गई। अब यह संस्था महान आकार ले कर एक एन.जी.ओ के रूप में स्थापित को चुकी है। वहीं इससे अनगिनत प्रवासी लाभ ले रहे है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर दिशा की उड़ान
संस्था के तौर पर अपना आकार ले चुकी दिशा का मुल उद्देश्य भारत व रूस दोनों राष्ट्रों के नागरिकों के बीच, वैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, दार्शनिक, व्यापारिक और नैतिक सांझेदारी को विश्व पटल पर स्थापित करने का है। जिसके लिए वह लगातार साहित्यिक गतिविधियों, गोष्ठियों , मेलों, सम्मेलनों, चर्चाओं, महोत्सवों, खेल प्रतियोगिताओं, फिल्म महोत्सवों, वाद-विवाद आदि के आयोजन के साथ साथ एक त्रैमासिक पत्रिका ‘दिशा’ को भी प्रकाशित करती रहती है। इसके अलावा दिशा रूसी- भारतीयों की मैत्री प्रगाढता को प्रकट करने के साथ साथ रूसी-भारतीय नागरिकों के मध्य विषमताओं को दूर कर उनके बीच मधुर संबन्धों को कायम करने की दिशा में कार्य करने में लगातार तत्पर रहती है। जिसके लिए किए गए प्रयासों के अंतर्गत संघ भारतीय और रूसी समाज के सरकारी एवं गैर- सरकारी संगठनों के साथ मिलकर अनेक कार्यक्रमों को संचालित किया जाता है।

दिशा के सहयोगी संगठन
दिशा संस्था के संस्थापन के बाद से ही लगातार महती कार्यों में विशेष रुचि रखती रही है। जिसमें भारत में उसके सहयोग के तौर पर उभर कर आए जवाहर लाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र ने महती भूमिका निभाई। वहीं इसके अलावा भारतीय राज दूतावास, मॉस्को लगातार विविध कार्यक्रमों में अति महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है। 

संस्था द्वारा प्रदत्त सम्मान
दिशा संस्था हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को भी अपना अहम उद्देश्य मानती है। जिसके अंतरगत ‘हिंदी मित्र सम्मान’ एवं ‘हिंदी सेवा सम्मान’ प्रतिवर्ष हिंदी दिवस पर विदेशी हिंदी सेवियों को प्रदान करती है। संस्था मॉस्को विश्वविद्यालय के अफ्रीकी एवं एशियन अध्ययन संस्थान के साथ साथ अन्य शहरों के विद्यार्थियों में रूसी छात्रों के बीच ‘हिंदी ज्ञान प्रतियोगिता’ का आयोजन करती है। 

दिशा के आगामी विशेष आयोजन
संस्था ने विद्वानों के साथ “भूमंडलीकरण में भारत और रूस का सांस्कृतिक योगदान” विषय के साथ साथ हिंदी की वर्तमान और भविष्य की अपार संभावनाओं के धरातल की खोज पर सार्थक चर्चा की थी। 26-27 अक्टुबर 2016 को “तृतीय क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन, मॉस्को” का भी भव्य आयोजन में सहयोगी के रूप में भाग लिया। “विश्व भाषा साहित्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी” पर देश विदेश के प्रकांड़ पंड़ितों के बीच हिंदी सम्मेलन करवा रहा है। इसी विषय को लेकर 13-17 मई 2018 को मॉस्को’ कजान एवं सेंटपीटर्स में सेमिनार कराए। वहीं संस्था इंडियन फिल्मस संस्था के साथ मिलकर क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों का उत्सव मनाने जा रही है।
भारतीय संस्कृति को पंख देती दिशा 
‘दिशा’पद्म श्री गेनादी पेचनीकोव की स्मृति में रूसी रामलीला का पुनः मंचन प्रारम्भ कर चुकी है। जिसके लिए विदेश की जमीं के अलावा बीते माह की 4 नवम्बर 2018 को अयोध्या शोध संस्थान अयोध्या की सहायता से दीपोत्सव कार्यक्रम में भाग लिया। वहीं लखनऊ की ऐशबाग की रामलीला के मंच से श्रोताओं को भाव विभोर करते हुए मंत्रमुग्ध कर दिया। 

साथ मिला जो तुम्हारा...............
अब बात आती है डाॅ. रामेश्वर सिंह के सफलता के पीछे अहमक राज की। अपनी माँ स्व. धनराजी व पिता स्व. रामकरण के जीवन संघर्षों को प्रेरणाश्रोत मानने वाले डा. रामेश्वर सिंह की विदेशी जमीन पर सफलता का विशेष किरदार उनकी जीवनसंगिनी ने निभाया है। जिन्होने सदैव उनके संघर्षो में उनका साथ दिया। जीवन के हर क्षेत्र में उनका साथ न छोड़ने वाली नाजेदजा सिंह अदम्य साहस की धनी है। हाल में मोरिशस में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन में डाॅ. रामेश्वर सिंह व नाजेद्जा सिंह को प्रवासी भारतीय सम्मान से नवाजा गया। जहां नाजेदजा सिंह पद्म श्री गेनादी पेचनीकोव के जीवन पर आधारित लेख पढ़ने का मौका मिला। बतौर डाॅ. रामेश्वर सिहं यह सम्मान दिशा का सम्मान है। 

प्रगति के पथ पर दिशा
दिशा एक अन्य संस्था के साथ मिलकर 2 अक्तुबर 2018 से ‘दिशा रेड़ियो का  प्रसारण शुरु कर चुकी है। वहीं फिल्म उत्सवों मे भी भाग ले रही है।
भारत में दिशा के आगामी कार्यक्रम
इसके लिए 16-17 जनवरी 2019 को हिसार में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेसटीवल में भाग ले रही है इसमें दो फिल्में डाॅ. रामेश्वर सिहं व नाजेददा सिंह लेकर जायेंगी। डाॅ. रामेश्वर सिहं एवं नाजेददा सिहं 19-20 जनवरी 2019 को बनारस में आयोजित गोपियो समीट में 21 जनवरी को ही उत्तरप्रेदेश प्रवासी भारतीय दिवस तथा 22-23 को ही बनारस में ही प्रवासी भारतीय दिवस में शिरकत करेंगे। दिशा  की ओर से ही 27 और 28 जनवरी 2019 को  प्रयागराज में पद्म श्री गेनादी पेचनीकोव की स्मृति ‘दिशा’ रामलीला, मास्को रूस का मंचन किया जायेगा।
वेब पोर्टल पर दिशा का पदार्पण
दिशा से वंचित व जानने की इच्छा रखने वालों के लिए एक अच्छी खबर हो सकती है। रूसी-भारतीय मैत्री संघ की ओर से “न्यूज पोर्टल” का  प्रारंभ होने जा रहा है। जिसमें लगातार दिशा के द्वारा की जाने वाली गतिविधियों से उसके प्रशंसक रूबरू होते रहेंगे।
विशेष रिपोर्टिग मयंक आलोक उर्फ आलोक अवस्थी

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