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रिपोर्टिंग को गए पत्रकार पर चीनी मिल मालिक समेत गुर्गों ने किया जानलेवा हमला

शाहजहांपुर। जनपद के थाना बंडा के अंतर्गत बजाज हिंदुस्तान मकसूदापुर चीनी मिल के कर्मचारियों ने पत्रकार पर जानलेवा हमला कर उसे घायल कर दिया। वंही खड़े स्थानीय किसानों के हस्तछेप के चलते उनकी जान बच सकी। वहीं जब पीड़ित पत्रकार ने पुलिस को मामले की जानकारी दे एफआईआर दर्ज कराना चाहा, तो उसे थाना अध्यक्ष ने उसे डपट कर भगा दिया। जिससे आक्रोशित हो पत्रकारों ने वरिष्ठ अधिकारियों से मिल, मामले की जानकारी दी। जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा सकी।  
जानकारी के अनुसार बंडा क्षेत्र के प्रसिद्ध सुनासीर नाथ मंदिर पर बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल मकसूदापुर के कर्मचारियों की गोपनीय बैठक हो रही थी।  तभी दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार संजीव अग्निहोत्री उसी तरफ निकले। वहां पर तमाम लोगों की भीड़ देखकर उन्होंने मामले को जान्ने की नियत से वे वहां जा पहुंचे। वे भीड़ में मौजूद लोगों से वंहा पर उनके एकत्र होने व वंहा हो रहे कार्यक्रम की जानकारी लेने लगे तभी वहां पर खड़े किसानों ने बताया कि यहां पर गन्ना गतौली संबंधित चीनी मिल के अधिकारियों की गोपनीय बैठक हो रही थी।  जिस पर वे आगे बढ़ बैठक की कवरेज करने के लिए वे बैठकस्थल में जा पहुंचे। जंहा उन्हें वीडियो बनाते देख कर चीनी मिल के कर्मचारी समेत चीनी मिल के एनजीएम हितेंद्र सिंह आग बबूला हो गए  और पत्रकार को घेर लिया और उसे पकड़कर चीनी मिल में ले जाकर उनकी धुनाई शुरू कर दी। इसी बीच कुछ ने भट्टी में डाल देने की बात कह उसे जबरन उठा लिया। इस बीच उन्होंने मिल मालिक के कहने पर बैठक की रिकॉर्डिंग में प्रयोग किये गए उसके मोबाइल भी छीन लिया। इसी बीच वहां पर खड़े किसानों ने हस्तक्षेप कर पत्रकार को बहुत मुश्किल से बचा मिल से बाहर निकलवाया। जंहा वह वहां से जान बचाकर भाग खड़ा हुआ। वंहा से भाग कर पत्रकार ने थाने में जा अभद्रता व जान से मारने की नियत से हमला करने वाले चीनी मिल के कर्मचारियों के खिलाफ तहरीर दी, तो थाना अध्यक्ष ने मुकदमा लिखने से साफ़ मना कर दिया। जिस पर पीड़ित पत्रकार के साथ आए साथी पत्रकारों ने मुकदमा ना लिखे जाने पर धरने पर बैठने की बात कही। इसके बाद भी बंडा थाना प्रभारी ने कहा यह भी करके देख लो फिर भी मैं मुकदमा नहीं लिखूंगा।  
जिसके बाद हताश पत्रकारों ने मामले की समुचित जानकारी पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों को दे अपनी जान माल की सुरक्षा की गुहार लगाई। जिसके बाद उनकी एफआईआर विभिन्न आईपीएस धारा 504'506'323'427'392 में दर्ज की जा सकी।  
विषम हालातों से जूझ रहे पत्रकार
उत्तर प्रदेश की सरकार ने पत्रकारों से करने वाले लोगों को सीधे जेल भेजने की बात कही थी।  फिर भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को किस तरह प्रशासन के अधिकारी शोषण कर रहे हैं।  यह सब जानने के लिए यह एक बानगी मात्र है। एक सवाल ऐसे में उभरता है कि जब पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है तो आम जनता के साथ प्रशासन के अधिकारी किस तरह का व्यवहार करते होंगे।  

 रिपोर्टर-अमरजीत सिंह

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