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40 वां सामाजिक न्याय सम्मलेन उन्नाव में हुआ संपन्न



उन्नाव। लोकनगर उन्नाव में निकट सांई मंदिर स्थित गार्डन ग्रीन (गेस्ट हाउस) में आयोजित सामाजिक न्याय सम्मलेन में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए इलाहबाद उच्च न्यायलय के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति मा.सभाजीत यादव कहा की आजादी के 71 वर्षो बाद भी देश की आजादी के आंदोलन का उद्देश्य अभी भी पूरा नहीं हो पाया है आजादी आकाश से गिरकर खजूर पर लटक गई है तथा आम आदमी तक नहीं पहुंच पाई है। देश में 16 बार लोकसभा तथा प्रदेश में 17 बार विधानसभा चुनाव द्वारा बार-बार सत्ता परिवर्तन के बावजूद भी देश में आर्थिक और सामाजिक विसमता की खाई कटने के बजाय निरंतर बढती जा रही है। देश में 73 प्रतिशत चल एवं अचल संपत्ति पर देश के मात्र 1 प्रतिशत लोगों का तथा 95 प्रतिशत चल और अचल संपत्ति पर देश के मात्र 10 प्रतिशत लोगों का कब्ज़ा हो गया है। शेष 90 प्रतिशत लोग मात्र 5 प्रतिशत चल और अचल संपत्ति पर गरीबी,कंगाली एवं बेबसी का जीवन बिताने को मजबूर है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तरप्रदेश में 50 प्रतिशत लोग भीमिहीन है। जिनके पास दिहाड़ी मजदूरी के आलावा परिवार चलाने के लिए अन्य कोई साधन नहीं है। हाल की अखबारी खबरों के अनुसार देश के 100 धन्ना सेठों की आमदनी में पिछले वर्ष 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई उनके ऊपर नोटबंदी एवं आर्थिकमंदी का कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा जबकि देश के माध्यम वर्ग के लोगो एवं गरीबो की आर्थिक आय में लगातार गिरावट हो रही है। आज भी देश में लगभग 38 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे है। लेकिन विगत लगभग 5 वर्षो में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा गठित योजना आयोग ने न तो गरीबी निर्धारण का कोई मापदंड निर्धारित किया और न ही गरीबी रेखा के निचे जीवन यापन करने वाले लोगो की वास्तविक संख्या देश को बताई। 30 सितम्बर 2016 को इलाहबाद से प्रकाशित एक अख़बार के अनुसार देश के 77 प्रतिशत परिवारों में आय का कोई नियमित साधन नहीं है।तथा देश की आबादी का 5 प्रतिशत हिस्सा प्रतिवर्ष बेरोजगार होता जा रहा है। यह आकड़ा श्रम ब्यूरो की वित्तीय वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट पर आधारित है ,इससे साफ जाहिर है कि केंद्र एवं प्रदेश की सरकारे किसी की भी रही हो लेकिन वे मात्र आद्योगिग घराने की मददगार रही है। सम्मलेन में सुंदरलाल लोधी, कृपाशंकर सिंह , बलराम सिंह, लालबहादुर सिंह, कृष्णपाल यादव, मुकेश यादव (प्रबंधक-चौधरी खजान सिंह महाविद्यालय), प्रशांत कटियार,जैद अहमद फारुकी, प्रो. रविकांत चन्दन, डॉ. अनिल विश्वकर्मा, आरके गोयल, अमरेश वर्मा, अजब सिंह यादव, गायत्री प्रजापति, नासिर खान, शुभाष यादव (आयोजक), आदि लोगो ने सम्बोधित किया तथा सैकड़ो की सांख्या में अधिवक्ता, पत्रकार, अध्यापक, सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले लोग उपस्थित रहे। 

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