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पुरवा में शिक्षा विभाग की मिली भगत से चल रहे अमान्य विद्यालय और कक्षाएं

...रिपोर्ट - रत्नम चौरसिया। (एडवोकेट)
पुरवा/उन्नाव। शिक्षा, वैसे तो किसी का भी भविष्य बना सकती है। लेकिन शिक्षा विभाग के कर्मचारी व अधिकारी इस कथन को असत्य साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
आपको अवगत करा दे कि कुछ दिन पूर्व उन्नाव बी एस ए को सांसद साक्षी महाराज द्वारा चेतावनी दी गई थी कि,अपनी कार्यशैली दुरुस्त कर लें, जब शिक्षा विभाग का आला अधिकारी ऐसा हो तो उसके कर्मचारी कैसे होंगे, इसका स्वयं अनुमान लगाया जा सकता है। खंड शिक्षा अधिकारी पुरवा व ए बी आर सी पुरवा ने तो गजब ही कर दिया। लगभग एक सप्ताह पूर्व उपरोक्त अधिकारियों की जवाबदेही पर एक समाचार पत्र में यह भ्रामक खबर प्रकाशित की गयी कि स्कूलों में चल रहे  अवैध वाहनों को लेकर नोटिस दी जा चुकी है। परन्तु अवैध वाहनों को लेकर बृहस्पतिवार को कई विद्यालयों को नोटिस दी गई है। इससे विद्यालय संचालकों में रोष व्याप्त है। विद्यालय संचालको का मानना है कि क्षेत्र में शिक्षा विभाग की मिलीभगत से अवैध कक्षाओं पर व अमान्य विद्यालयों पर अधिकारी विराम नहीं लगा रहे हैं, केवल अपनी जेबे भर रहे हैं। वही शिक्षा अधिकारी अपना उल्लू सीधा करने के लिए इस तरह की नोटिस जारी करते रहते हैं। इसी की आड़ में धन की उगाही करना चाहते हैं। जबकि लगातार शिकायतों के बावजूद क्षेत्र में अमान्य विद्यालय व अमान्य कक्षाओं का संचालन जारी है। कई मामलों में तो शिक्षा विभाग ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी भी नहीं उपलब्ध कराई है। मान्यता प्राप्त विद्यालयों के संगठन ने इसका विरोध करने का मन बना लिया है और इस प्रकरण को उच्चाधिकारियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री महोदय तक ले जाने की बात कही है। 
विद्यालय संचालकों ने यहां तक बताया कि अमान्य विद्यालयों को संचालित करने के लिए शिक्षा विभाग ने मोटी रकम वसूली है। इसलिए खुद को ईमानदार साबित करने हेतु नया पैतरा निकाला हैं। जबकि विद्यालय वाहनों के मानकों को खंगालने का अधिकार आर टी ओ को है। मूल समस्या से ध्यान भटकाने के लिए पुरवा विकास खण्ड के शिक्षा अधिकारी इस तरह का नोटिस जारी कर रहे हैं। इस नोटिस की आड़ में अवैध वसूली का जरिया खोज रहे हैं। लेकिन अब मान्यता प्राप्त विद्यालयों के संचालकों ने आर-पार की लड़ाई करने का मन बना लिया है।