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एक और शिक्षक का गलत तरीके से हुआ निलम्बन, बेशिक शिक्षा विभाग की कार्य शैली पर उठे सवाल


...रिपोर्ट - रत्नम चौरसिया। (एडवोकेट) 
पुरवा/उन्नाव। टीकर खुर्द प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को फर्जी आरोप लगाकर निलम्बित कर दिया गया। शिक्षक के समर्थन में गांव वालों ने विद्यालय में ताला बंद कर दिया। इससे कई घण्टे स्कूल बंद रहा। नायब तहसीलदार ने पुलिस की मदद से ताला तुड़वाकर विद्यालय खुलवाया।
बेसिक शिक्षा विभाग की कारगुजारी इन दिनों सबकी जुबान पर है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय तो भ्रष्टाचार की चपेट में  पूरी तरह से है ही, साथ ही खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी संलिप्त है। इसी कड़ी में प्राथमिक विद्यालय टीकर खुर्द के प्रधान अध्यापक दिनेश चन्द्र यादव को एक फर्जी शिकायत पर निलम्बित कर दिया गया। जबकि शिकायत कर्ता उक्त गांव का निवासी भी नहीं है। वहीं प्रधान शिक्षक का आरोप है कि बिना जांच किए और बिना किसी नोटिस के निलंबित कर दिया गया। शिक्षक को शुक्रवार की सायं इस निलम्बन की सूचना दी गई। शनिवार की सुबह जैसे ही गांव वालों को प्रधान शिक्षक के निलंबन की सूचना मिली तो सब गांव वालों ने मिलकर विद्यालय में ताला बंद कर दिया और शिक्षा अधिकारियों की कार्रवाई की निन्दा की। सूचना मिलने पर पहुंचे खण्ड शिक्षा अधिकारी प्रवीण दीक्षित ने ताला खुलवाने के लिए हाथ पांव मारे पर सफल न हुए। तब उच्चाधिकारियों को इस घटना से अवगत कराया गया।   आपको बता दें कि इस परिसर में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों ही स्तर के विद्यालय संचालित हैं। प्राथमिक विद्यालय में 78 छात्र व उच्च प्राथमिक विद्यालय में 72 छात्र नामांकित है। प्राथमिक विद्यालय में प्रधान शिक्षक समेत तीन अन्य अध्यापक राम प्रकाश द्विवेदी,  शैलेन्द्र सिंह, अरुण कुमार कार्यरत हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान शिक्षक दिनेश चन्द्र यादव की कार्यशैली बेहतर है। वह समय से विद्यालय आते-जाते हैं। जबकि बाहर से आने वाले शिक्षक देर से आते हैं और शिक्षण कार्य भी नहीं करते। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे शिक्षक को उच्चाधिकारी कैसे निलम्बित कर सकते हैं? प्रधान शिक्षक ने बताया कि निलम्बन का पत्र 26 अक्तूबर का है किन्तु सूचना आज दी गई है। वहीं ग्रामीणों में यह भी चर्चा है कि स्थानीय खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय की मिलीभगत से सब अनियमितता हो रही है। नायब तहसीलदार वी एन श्रीवास्तव व कोतवाली प्रभारी पुरवा अरुण प्रताप सिंह की अगुवाई में विद्यालय का ताला तोड़ा गया। 
आपको यह भी अवगत करा दे कि इससे पूर्व भी इस शिक्षक को गबन के एक फर्जी मामले में आरोपित करके निलम्बित किया गया था। शिक्षक ने विभागीय अधिकारियों के बहुत चक्कर काटे थे किन्तु राहत न मिलने पर उसने माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली थी और वहां से बाइज्ज़त शिक्षक बरी हुआ था। माननीय उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग को शिक्षक को तत्काल पद पर बहाल करने के निर्देश दिये थे। तब से शिक्षक इसी विद्यालय में प्रधान शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने ने विद्यालय में कई विकास कार्य भी कराए हैं। विद्यालय परिसर में सी सी रोड प्रत्येक कक्ष तक, मिट्टी भराकर इण्टरलाकिंग, सबमर्सबल, कमरों में टायल्स आदि कार्य प्रधान शिक्षक ने अपने प्रयासों से कराए हैं। साथ ही कुछ विकास कार्य अभी प्रस्तावित है। पूरे ग्रामीण प्रधान शिक्षक की कार्यशैली से प्रभावित होकर उनके साथ हैं। किन्तु शायद विभाग व उच्चाधिकारियों को प्रधान शिक्षक की बेहतर कार्यशैली रास नहीं आ रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार में कण्ठ तक डूबा हुआ है। अभी कुछ दिन पूर्व क्रीड़ा शुल्क के नाम पर 500-500 रुपये सभी विद्यालयों से वसूले गये हैं। घटना के दौरान जब बीईओ प्रवीण दीक्षित से घटना के बाबत स्थानीय प्रतिनिधि ने बात करनी चाही तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। इस दौरान एबीआरसी संतोषी नन्दन शुक्ला, एनपीआरसी राम जनम सिंह, प्रधान पति सुनील कुमार समेत सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।