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महानायक ने बांटी किसानों में ऐसी नेमत कि लोंगो ने दी ढेरों दुआएं

डेस्क। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के आमंत्रण सूचना के बाद किसानों के मन की मुराद उस वक्त पूरी हो गईं जब बिग बी ने किसानों को अपनी मिट्टी से जोड़ दिया। हृदय को छू जाने वाले अमिताभ के एक-एक शब्द बुधवार को मुंबई से वाराणसी लौटे किसानों के लिए अमृतवाणी सरीखा नजर आयी। गदगद किसानों में बिग बी के लिए अपार स्नेह तो था ही दुआएं भी काशी की धरती से मुंबई तक बिग बी को दे रहे थे। बिग बी की
बिग बी की बातों से उछल गए किसान- 
अमिताभ बच्चन के घर से वाराणसी पहुंचे किसान हरिप्रसाद ने बताया कि अभी तक टीवी पर दिखने वाले हीरो को जब आंखों के सामने देखा तो सहसा एक बार विश्वास नहीं हुआ। आश्वर्य तो तब हुआ जब उन्होंने अपने साथ हमें खाना खिलाया। यही नहीं मुंबई की सड़कों व वहां के प्रसिद्ध स्थलों पर घूमने का मौका भी दिया। वहीं प्रफुल्ल कुमार, अशोक, सूरत व रामसिंह ने बताया कि अमिताभ बच्चन ने हमसे कहा कि आप लोग हमारी मिट्टी से आए हैं। ये हमारे लिए गौरव की बात है। आगे ऐसा ही कुछ करने का मौका मिला तो बेहतर करने का प्रयास करूंगा। किसानों ने बताया कि ये बातें हमारे लिए किसी स्वप्न से कम नहीं थीं। जिसे हमेशा टीवी व सिनेमा घरों में देखा उसे सामने देखकर खुशी तो हुई ही उससे अधिक अपने पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा था। कुछ किसानों ने बताया कि काश, देश में कुछ लोग अमिताभ बच्चन की तरह बड़ा दिल दिखाते तो किसानों को आत्महत्या करने की नौबत ही नहीं आती।

किसानों को घोषित किया था एनपीए-
लोन के भुगतान में किसानों की हालात जब नहीं देने की स्थिति हो जाती है तो बैंक लोनधारी को लीगल एक्शन का नोटिस देता है। ऐसे लोन को बैंक एनपीए 'नॉन परफार्मिंग एसेट' या बैड लोन घोषित करता है। ऐसे ही जिले के 55 किसानों को सदी के महानायक ने अपनी दरियादिली से लोन के भार से मुक्त कर दिया है। हालांकि भदोही, चंदौली व वाराणसी से कुल 51 किसान मुंबई गए थे। 
ट्विटर पर बधाइयों का तांता-
किसानों को राहत देने की सूचना बिग बी के ट्विटर पर देते ही हजारों लोगों ने शुभकामना संदेश दे दिया। उसमें किसानों का दर्द बांटा तो कुछ ने बिग बी की तरह अन्य लोगों को आगे आने की अपेक्षाएं भी जोड़ीं। एनपीए की जिले में स्थितिर, एलडीएम मिथिलेश कुमार ने बताया कि जिले में एनपीए खाता 39,940 हैं। इसमें 1079.67 करोड़ रुपए हैं। संभावना है कि इतनी बड़ी राशि में किसानों की बड़ी संख्या है जो एनपीए हैं।