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चीन में मुस्लिमों को मिल रही है ऐसी भयानक सजा कि आप भी बहा दोगे आसूं ....... एक खास रिपोर्ट


-मयंक आलोक
साभार वेब दुनिया
डेस्क। इन दिनों देश के पश्चिमी प्रांत शिनजिंयाग में अल्पसंख्यक मुसलमानों के प्रति अपने रवैये की वजह से चीन की भारी आलोचना हो रही है। वहीं सूत्रों की माने तो चीन ने इस राज्य में बड़ी संख्या में मुसलमानों को खास तरह के कैंपों में कैद कर रखा है।
अगस्त में एक संयुक्त राष्ट्र की कमेटी को बताया गया था कि शिनजियांग में करीब दस लाख मुसलमानो को एक तरह की हिरासत में  रखा गया है, जहां उन्हें दोबारा शिक्षा देने के नाम पर जुल्म ढाए जा रहें है। वहीं जब विश्व समुदाय में जब चीन का विरोध होना शुरू हुआ तो चीन इस खबरों का खंडन करता दिखा। उसके अनुसार वहाॅ पर ऐसा कुछ भी नही है।  लेकिन इस दौरान शिनजियांग में लोगों पर निगरानी के कई सबूत सामने आने के बाद विश्व समुदाय में हड़कंप मचा हुआ हैं।
आइए समझते हैं कि इस कहानी की अलग-अलग पहलू क्या हैं -
कौंन हैं वीगर मुस्लिम?

चीन के पश्चिमी प्रांत शिनजियांग में रहने वाले एक करोड़ से अधिक वीगर समुदाय के अधिकतर लोग मुसलमान हैं। ये लोग खुद को सांस्कृतिक नजर से मध्य एशिया के देशों के करीब मानते हैं. उनकी भाषा भी तुर्की से मिलती-जुलती हैं। 
लेकिन हाल के वर्षों में भारी संख्या में चीन के बहुसंख्यक नस्लीय समूह यानी हान चीनियों का शिनजियांग में बसना एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है. वीगर लोगों को लगता है कि अब उनकी रोजी-रोटी में संस्कृति खतरे में पड़ रही है।
 
कहां है शिनजियांग?
शिनजियांग चीन के पश्चिम में देश का सबसे बड़ा प्रांत है। इसकी सीमाएं भारत, अफगानिस्तान और मंगोलिया जैसे कई देशों से मिलती हैं. कहने को तो ये भी तिब्बत की ही तरह एक स्वायत्त क्षेत्र है लेकिन दरअसल यहां की सरकार की डोर बीजिंग के ही हाथ में है।
सदियों से इस प्रांत की अर्थव्यवस्था खेती और व्यापार पर केंद्रित रही है।  ऐतिहासिक सिल्क रूट की वजह से यहां खुशहाली रही है। बीसवीं सदी की शुरुआत में वीगर समुदाय ने थोड़े वक्त के लिए ही सही, शिनजियांग के आजाद घोषित कर दिया था। लेकिन 1949 की कम्यूनिस्ट क्रांति के बाद ये प्रांत चीन का हिस्सा बन गया।
 
इस वक्त शिनजियांग में क्या हो रहा है?
अगस्त 2018 में संयुक्त राष्ट्र की एक मानवाधिकार कमेटी को बताया गया था कि पूरा वीगर मुसलमान स्वायत्त क्षेत्र नजरबंदी में है। इस कमेटी को बताया गया था कि करीब 10 लाख लोग हिरासती जिंदगी बिता रहे हैं। ऐसी रिपोर्टों की पुष्टि ह्यूमन राइट्स वॉच भी करता है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि एक तरह के हिरासती कैंपों में रखे गए लोगों को चीनी भाषा सिखाई जाती हैं और उन्हें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रति वफादारी की कसम खानी होती है। साथ ही लोगों से उनके धर्म और संस्कृति की आलोचना करने को कहा जाता है।
ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक वीगर समुदाय को बेहद सख्त निगरानी का सामना करना पड़ता है. लोगों के घरों के दरवाजे पर फत् कोड्स लगे हुए हैं और चेहरे को पहचानने के कैमरे फिट हैं। अधिकारी जब चाहें तब ये पता लगा सकते हैं कि घर अंदर कौन है।
समाचार एंजेसी ने वीगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों को खोजने में निभाई अहम भूमिका शिनजियांग से सीधी खबरें आना बहुत मुश्किल है। वहां मीडिया पर पाबंदी है लेकिन समाचार एंजेसी ने कई बार इस क्षेत्र से रिपोर्ट्स की हैं और खुद इन कैंपों के सबूत देखे हैं। एंजेसी ने कई ऐसे लोगों से भी बात की है जो इन जेलों में रह चुके हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं आमिर आमिर ने एंजेसी को बताया - वो मुझे सोने नहीं देते थे। मुझे कई घंटों तक लटका कर रखा जाता था. मेरी चमड़ी में सूइयां चुभाई जाती थीं। प्लास से मेरे नाखून नोचे जाते थे। टॉर्चर का सारा सामान मेरे सामने टेबल पर रखा जाता था ताकि में खौफजदा रहूं. मुझे दूसरे लोगों के चीखने की आवाज सुनाई देती थी। अजात नाम के अन्य पूर्व कैदी ने बताया - डिनर के वक्त करीब 1200 लोग हाथों में प्लास्टिक की कटोरियां लेकर चीन समर्थक गीत गाते थे। वो सब रोबोट की तरह दिखते थे. उनकी तो आत्मा ही मर गई थी। मैं उनमें से कई लोगों को जानता हॅू वो सब ऐसे व्यवहार करते थे कि जैसे कि कार दुर्घटना में अपनी यादाश्त खो चुके हों।

वीगर समुदाय की हिंसा?
चीन का कहना है कि उसे अलगाववादी इस्लामी गुटों से खतरा है क्योंकि कुछ वीगर लोगों ने इस्लामिक स्टेट समूह के साथ हथियार उठा लिए हैं। साल 2009 में शिनजियांग की राजधानी ऊरूमची में हुए दंगों में हान समुदाय के 200 लोग मारे गए थे। उसके बाद से यहां हिंसा बढ़ी है। जुलाई 2014 में पुलिस स्टेशन और सरकारों दफ्तरों पर हुए हमले में 96 लोग मारे गए थे।
अक्तूबर 2013 में बीजिंग के तियाननमेन स्क्वायर में एक कार भीड़ में घुसी और कई लोगों के कुचल दिया। इसके लिए भी शिनजियांग के अलगाववादियों को जिम्मेदार बताया गया था। सरकार की ताजा कार्रवाई के पीछे फरवरी 2017 में छुरेबाजी की घटनाएं हैं।

चीन का क्या कहता है?
चीन का कहना है कि शिनजियांग में हिंसक आतंकवादी गतिविधियों से निपट रहा है। जिनेवा में एक संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में चीनी अधिकारी हू लियानहे ने कहा था कि दस लाख लोगों को हिरासत में रखे जाने की बात महज एक कोरा झूठ है। लेकिन सितंबर 2018 में लोगों को प्रोफेशनल प्रशिक्षण केद्रों में उन्हें प्रशिक्षण देने के नाम पर कैदी बना कर रखा गया है। चीन के मानवाधिकार विभाग के एक अधिकारी ने कहा है, आप कह सकते हैं कि ये तरीका सबसे उपयुक्त नहीं है लेकिन धार्मिक चरमपंथ से निपटने के लिए ऐसा किया जाना जरूरी है। क्यों पश्चिम के देश इस्लामी चरमपंथ से लड़ने में असफल हो गए हैं। बेल्जियम और पेरिस में हुए हमले इसका सबूत हैं कि पश्चिम असफल रहा है। आमतौर पर चीन अक्सर अपने शिनजियांग पर कोई सार्वजनिक राय नहीं देता. साथ ही शिनजियांग में बाहरी लोगों और मीडिया के प्रवेश की पूरी तरह से नियंत्रित करता है।

दुनिया क्या कर रही है?
दुनिया भर में वीगर समुदाय के प्रति चीनी रवैया की आलोचना बढ़ती जा रही है। लेकिन अब तक किसी भी मुल्क ने आलोचना भरे शब्दों से आगे कोई कदम नहीं उठाया है।
अमरीका में कांग्रेस की चीनी मामलों की कमेटी ने ट्रंप प्रशासन से शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़ी कंपनियों और अधिकारियों पर पाबंदी लगाने की गुहार की है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है - अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय को हिरासत में रखा जा रहा है। उनका टॉर्चर हो रहा है। उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्याताओं पर पाबंदी लगी हुई है। उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हर पहलू निगरानी में है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संगठन की नई प्रमुख मिशेल बेशलेट ने भी शिनजियांग में पर्यवेक्षकों को शिनजियांग में जाने देने की अनुमति मांगी है। चीन ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए गुस्से का इजहार किया है