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सुरखी में बिना चेहरे भाजपा का प्रचार शुरू



सागर। भले ही भाजपा ने सुरखी विधानसभा में विधायक प्रत्याशी घोषित नहीं किया लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने जनसंपर्क और प्रचार शुरू कर दिया है, हालांकि अटकलों का दौर जारी है जब लोग भाजपा कार्यकर्ताओं से पूछते हैं कि टिकिट किसको मिला तो यही जबाब देते हैं कि कमल के फूल को भाजपा कार्यकर्ता कुछ भी कहें लेकिन प्रत्याशी का चेहरा मायने रख रहा है ।चर्चाओं का बाजार गर्म एक तरफ चर्चा है कि ग्रहमंत्री भूपेन्द्र सिंह यहां से चुनाव लड रहे हैं क्योंकि यहां से वो पहले दस साल विधायक रहे हैं और फिर सुरखी लौट सकते हैं उनके खास समर्थक भी यही चाहते हैं क्योंकि भूपेन्द्र सिंह का कद और पद बढने से उनको फायदा होगा लेकिन उन के बारे में आम जनता की राय ठीक नहीं है इसका मुख्य कारण यही है कि सरकार न होते हुये भी सुरखी की जनता उनको दस साल विधायक बनाये रही और क्षेत्र के विकास के बारे में उनका यही जबाब रहा कि सरकार नहीं है खुरुई की जनता ने भी एक बार हराया और एक बार जिताया तीन विभागों के मंत्री रहते हुये सारा विकास खुरुई में बहाया सुरखी में विकास के नाम पर छींटा तक नहीं मारा अब किस मुंह से दोबारा जनता से वोट मांग पायेगें ।वही जब वर्तमान विधायक पारूल साहू की बात आती है तो लोग यही कहते सुने जाते हैं कि पांच साल पहले पारूल के पिता संतोष साहू चाचा कमलेश साहू भाई सतीश साहू और अन्य परिजनों ने सुरखी में उनको जिताने डेरा डाल रखा था लेकिन चुनाव जीतने के बाद लोग उनके दर्शनो को तरस गये चुनाव के समय पारूल घरों के अंदर घुस घुसकर जहां महिलाओं के गले से लिपटकर चाची दादी भाभी बहिन कहकर ये कहतीं थी कि कभी कोई समस्या हो तो अपनी इस बहन बेटी से निःसंकोच बताना आधी रात में आपके दुख दर्द में खडी रहूंगी लेकिन चुनाव के बाद वही महिलायें उनसे मिलने को तरस गई। यहां तक कि कुछ कार्यकर्ता भी नाराज नजर आ रहे हैं,तीसरा नाम राजकुमार धनौरा का भी सुनने में आ रहा है जिनको पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ताओं को छोडकर आम जनता नहीं जानती  और पहले से नये चेहरे के चक्कर में ठगी जनता बिल्कुल पसंद नहीं कर रही पारूल साहू अपने विकास के मामले में उपलब्धियों में बडे-बडे तालाब तो गिनवातीं है,जिनसे किसानों को लाभ तो पहुंचा है लेकिन रहवासी इलाकों में जनता आज भी पीने के पानी को तरस रही है। इसके अलावा भी और कोई सक्षम प्रत्याशी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। अब ऐसे में यह देखना बाकी है कि भाजपा के पास कोई हुकम का इक्का बाकी है जिसमें कोई चमत्कार हो सके वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के गोविद सिंह राजपूत के पास भी कोई खास मुद्दा नहीं है जिससे इन मुद्दों से हटकर विपक्षी को घेर सकें।
...रिपोर्ट - हेमंत आठिया। (सागर मध्यप्रदेश)