Ad

ads ads

Breaking News

उर्जित पटेल दे सकते हैं गवर्नर पद से इस्तीफा, मोदी सरकार चाहती है RBI के कामकाज में दखलंदाजी



डेस्क। खबरें आ रही हैं कि आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं। दरअसल, रिजर्व बैंक और सरकार के बीच तकरार ज्यादा बढ़ गई है। अगर सरकार रिजर्व बैंक का सेक्शन 7 लागू करती है, तो उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं।
रिजर्व बैंक के सेक्शन 7 के तहत सरकार को ये अधिकार है कि वो आरबीआई के गवर्नर को गंभीर और जनता के हित के मुद्दों पर काम करने के लिए निर्देश दे सकती है। इससे शेयर बाजार में काफी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। फाइनेंशियल मार्केट में सेंटिमेंट्स पहले चलते हैं और तथ्यों पर बात बाद में होती है।
कयासों से शेयर बाजार अस्थिर हो सकता है और काफी जटिलता आ सकता है। कम से कम इक्विटी में शॉर्ट टर्म में ऐसा हो सकता है। बताते चलें कि ILFS में संक्रमण की महज अटकलों से अन्य अच्छी तरह से चलने वाली हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के स्टॉक कई सालों के निचले स्तर पर पहुंच गए थे।

फिर, यह अटकलें थीं कि भारतीय रिजर्व बैंक रुपए को सपोर्ट नहीं करेगा, जिसकी वजह से भारतीय मुद्रा ऑल टाइम लो पर चली गई। अब सेक्शन 7 की बात खबरों की सुर्खियां बन रही है। सरकार और आरबीआई दोनों ने अब तक इस मामले के तथ्यों पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है।

क्या है सेक्शन 7 
सरकार ने हाल के हफ्तों में रिजर्व बैंक को पत्र भेजे हैं। ये पत्र सेक्शन7 के अधिकार के तहत भेजे गए हैं। इसमें NBFC के लिए नकदी, कमजोर बैंकों के लिए पूंजी और एसएमई को लोन जैसे मुद्दे शामिल हैं। सेक्शन 7 में कहा गया है कि सरकार रिजर्व बैंक के गवर्नर से बातचीत करने के बाद समय-समय पर जनता के हित में रिजर्व बैंक को आदेश दे सकती है।

हालांकि, अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि ये सेक्शन कैसे काम करता है क्योंकि इसका अभी तक उपयोग नहीं हुआ है। इससे रिजर्व बैंक की स्वायत्तता पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, रिजर्व बैंक का देश में महंगाई को नियंत्रित करने और बैंक नोट को जारी करने काम करता है।

सरकार नहीं देती है आरबीआई के काम में दखल

रिजर्व बैंक एक स्वतंत्र संस्था के तौर पर काम करता है। सरकार इसमें दखल नहीं देती है। मगर, बीते दिनों से सरकार और आरबीआई के बीच मतभेद बढ़ता जा रहा है। सरकार कभी सीधे रिजर्व बैंक को निर्देश नहीं देती है।

सरकार चाहती है कि अगर पटेल इस्तीफा देते हैं, तो अगला गवर्नर कोई ब्यूरोक्रेट हो। दरअसल, सरकार को लगता है कि इकोनॉमिस्ट के तौर पर रिजर्व बैंक का गवर्नर भारत के लिए ठीक से काम नहीं कर सकता है।

बताते चलें कि मंगलवार को वित्तमंत्री अरुण जेटली ने रिजर्व बैंक की तीखी आलोचना करते हुए कहा था कि शीर्ष बैंक 2008 से 2014 के बीच अंधाधुंध कर्ज देने वाले बैंकों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहा। उन्होंने कहा कि बैंकों में फंसे कर्ज (एनपीए) की मौजूदा समस्या का यही कारण है।

बचा है अभी 11 महीने का कार्यकाल 
कहा जा रहा है कि वर्तमान हालात का असर उर्जित पटेल के भविष्य पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट का कहना है अगले साल सितंबर में उर्जित पटेल के तीन साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। मगर, इससे पहले ही उनके इस्तीफे के कयास लगाए जा रहे हैं।

बताते चलें कि केवल 2018 में ही कम से कम समय में आधे दर्जन नीतिगत मसलों पर सरकार और आरबीआई के बीच मतभेद उभरे हैं। सरकार की नाराजगी ब्याज दरों में कटौती नहीं किए जाने को लेकर भी रही है। नीरव मोदी की धोखाधड़ी सामने आने के बाद भी सरकार और केंद्रीय बैंक में तनाव की स्थिति पैदा हुई थी। पटेल चाहते हैं कि सरकारी बैंकों पर नजर रखने के लिए आरबीआई के पास और शक्तियां होनी चाहिए।

विरल आचार्य ने उठाया था सवाल 

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने शुक्रवार को कहा था कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता को नजरअंदाज करना विनाशकारी हो सकता है। आरबीआई की नीतियां नियमों पर आधारित होनी चाहिए। उनके भाषण को आरबीआई की वेबसाइट पर भी पोस्ट किया गया है।

विरल ने कहा कि सरकार के केंद्रीय बैंक के कामकाज में ज्यादा दखल देने से उसकी स्वायत्ता प्रभावित हो रही है। केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार से थोड़ा दूरी बनाकर रखना चाहती है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। सरकार की तरफ से बैंक के कामकाज में सीधा हस्तक्षेप किया जा रहा है, जो कि घातक हो सकता है।


साभार - नईं दुनियां