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जांबाज कर्नल गोवर्धन गोपाल को नम आंखो से दी गई अंतिम विदाई

  

लखनऊ। शाम को सूर्य अस्त होते ही जब सेना के जवानों ने बैकुंठ धाम पर अंतिम धुन बजायी तो माहौल गमगीन हो गया। तिरंगे से लिपटे ताबूत में शहर के जांबाज कर्नल गोवर्धन गोपाल गुडुर का पार्थिव शरीर था। परिवारीजनों ने जहां नम आंखों से कर्नल गुडुर को अंतिम विदाई दी। वहीं सैन्य अफसरों और जवानों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की। सैनिक सम्मान के साथ शस्त्र सलामी दी गई। कर्नल गोवर्धन गोपाल गुडुर रविवार को असम में शहीद हो गए थे। वह मूलरूप से कर्नाटक के बेंगलुरु के रहने वाले थे। जबकि उनका परिवार लखनऊ छावनी स्थित आरएके मार्ग पर रहता है। कर्नल गुडुर पिछले महीने लखनऊ आए थे।

रविवार रात उनके शहीद होने की सूचना सेना ने परिवारीजनों को दी। कर्नल गुडुर को 13 मई वर्ष 2000 में सेना में अधिकारी के रूप में कमीशंड प्राप्त हुआ था। इस समय उनकी तैनाती असम में थी जहां वह 12 सिख लाइ इंफेंट्री यूनिट की कमान संभाल रहे थे। वह बहुत जांबाज अफसर थे। अपनी वीरता से उन्होंने कई ऑपरेशनों का सफल नेतृत्व भी किया।

उनके परिवार में पत्‍नी हर्षिता और छह वर्ष का बेटा मेधांश है। कर्नल गुडुर का पार्थिव शरीर सोमवार को लखनऊ पहुंचा। उनके आरएके मार्ग स्थित घर पर परिवारीजनों ने अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर विशेष वाहन से बैकुंठ धाम लाया गया। सेना की बैंड टुकड़ी की शोक धुन के बीच पार्थिव शरीर बैकुंठ धाम पहुंचा। यहां उनको मध्य कमान के सेनाध्यक्ष ले. जनरल अभय कृष्ण की ओर से मध्य यूपी सब एरिया मुख्यालय के एडम कमांडेंट कर्नल मुक्तेश कपिल ने पुष्पचक्र अर्पित किए।