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09-15 वर्ष तक के सभी बच्चों को लगे मीजिल्स रूबैला का टीका - जिलाधिकारी



उन्नाव। जिलाधिकारी देवेन्द्र कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में मीजिल्स रूबैला टीकाकरण अभियान के तहत कलेक्ट्रेट स्थित पन्नालाल सभागार में बैठक संपन्न हुई। बैठक में सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया कि मीजिल्स रूबैला टीकाकरण से एक भी बच्चा वंचित ना रह जाए, 09 माह से लेकर 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को रूबैला टीकाकरण अवश्य लगना चाहिए। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ लालता प्रसाद ने सभी प्रधानाचार्यों/नोडल टीचर को निर्देशित करते हुए कहा कि आप सभी को मीजिल्स रूबैला टीकाकरण अभियान जागरूकता कार्यक्रम में भाग लेते हुये सभी बच्चों का टीकाकरण करवाना है और जिन बच्चों का टीकाकरण हुआ है उनकी सूची तैयार करनी है। 26 नवम्बर 2018 से यह अभियान चलाया जाना है। उन्होंने कहा कि अभियान के समय व स्थान तय करने में ए0एन0एम0 को पूरा सहयोग प्रदान करें और प्रति विद्यार्थी को उसके अभिभावकों के लिए खसरा रूबैला सूचना पत्र दें। उन्होंने कहा कि पैरेंट्स टीचर मीटिंग का आयोजन कर अभिभावकों की शंकाओं का समाधान करें। यदि आवश्यक हो तो इसके लिए क्षेत्र से संबंधित चिकित्सा कर्मी से उनकी बात कराएं। टीकाकरण की तिथियों एवं स्थल की सूचना व्हाट्स-ऐप, ई-मेल, एस0एम0एस0, पत्र व स्कूल की वेबसाइट द्वारा भी उन तक पहुंचाएं। बैठक में उपस्थित सभी प्रधानाचार्यों/नोडल टीचर को बताया गया कि सभी विद्यार्थियों को सूचित करें कि टीकाकरण से पहले अपना नाश्ता कर लें, खाली पेट ना हो। स्कूल में खसरा व रूबेला से संबंधित प्रतियोगिता या चित्र कला प्रदर्शनी का आयोजन करें। 
बैठक में जिलाधिकारी द्वारा सभी प्रधानाचार्यों/नोडल टीचर को निर्देश दिया गया कि खसरा रूबैला के टीकाकरण अभियान में एक शिक्षक के रूप में आप की अहम भूमिका है टीकाकरण के दौरान आप सभी अवश्य सुनिश्चित करें कि टीकाकरण के लिए एक आचरण युक्त वातावरण बना रहे, टीकाकरण हेतु एक सहायक वातावरण बनाने के लिए अभिभावकों की जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए यदि आवश्यक हो तो अभिभावकों की सुविधा के लिए यदि अभिभावक कोई प्रश्न पूछे तो स्पष्ट रूप से उन्हें उत्तर दें। यदि अभिभावक टीकाकरण स्थल पर आना चाहंे तो उन्हें अनुमति दें। 
मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि खसरा रूबैला के टीकाकरण अभियान के बाद आप सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक बच्चा अपने टीकाकरण के बाद 30 मिनट तक निगरानी में आराम करें। उन्होंने कहा कि बच्चा टीकाकरण के 30 मिनट बाद तक ए0एन0एम0 की निगरानी में रहेगा और उसे हल्का नाश्ता, पानी आदि उपलब्ध कराया जाएगा। यह टीका 0.5 एम0एल0 के डोज में दिया जाता है। टीकाकरण के बाद यदि किसी बच्चे को बुखार आता है, आंखों में लालिमा इत्यादि लक्षण नजर आयें तो सुपरवाइजर या ए0एन0एम0 को सूचित करें। टीकाकरण के बाद यदि विद्यार्थी कुछ ज्यादा कमजोर या थका हुआ महसूस करता है तो तुरन्त चिकित्साधिकारी/ए0एन0एम0 /स्कूल नर्स को सूचित करें। उनके पैरों को थोड़ा सा ऊंचा करके उसे लिटा दिया जाये या उसके घुटनों के बीच सिर झुका कर उसे बैठा दें। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि खसरा रूबैला टीकाकरण खसरा और रूबैला बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को रूबैला के प्रति प्रतिरक्षित किया जा चुका है तो नवजात शिशु भी कंजेनिटल रूबैला सिंड्रोम (सी0आर0एस0) के प्रति सुरक्षित रहेगा। उन्होंने बताया कि बच्चों में यह रोग आमतौर पर हल्का होता है, जिसमें खारिश, कम डिग्री का बुखार, मिचली और हल्के नेत्र-शोध (कंजेक्टिविटीज) के लक्षण दिखाई पड़ते हैं। कान के पीछे और गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियां सबसे विशिष्ट चिकित्सीय लक्षण हो सकते हैं। संक्रमित वयस्क, ज्यादातर महिलाओं में जोड़ों में पीड़ा हो सकती है। यह वायरस लड़के और लड़कियों-दोनों को संक्रमित कर सकता है। यदि कोई स्त्री गर्भावस्था के आरंभ में रूबैला वायरस से संक्रमित हो गई तो स्त्री में जन्मजात रूबैला सिंड्रोम (सी0आर0एस0) विकसित हो सकता है जो उसके गर्भ में पलने वाले नवजात शिशु के लिए बेहद गंभीर हो सकता है। इसमें से बहुत से लोग जीवनभर के लिए विकलांग बन सकते हैं जिनके उपचार, शल्य चिकित्साओं आदि पर बहुत अधिक धन व्यय करना पड़ता है। इस संक्रमण के कारण गर्भपात, मृत शिशु का जन्म आदि हो सकता है। जन्मजात रूबैला सिंड्रोम के कारण बहुत से रोग, विशेषकर आंखों (ग्लूकोमा, मोतियाबिंद) कानो (सुनने की शक्ति खत्म होना) मस्तिष्क (माइक्रोसिफ्ली, मानसिक विकास में अवरोध) तथा हृदय को प्रभावित कर सकते हैं। सी0आर0एस0 से बचाव इस आयु वर्ग के बच्चों को टीका लगवा कर किया जा सकता है, यह टीका 09 माह से लेकर 15 वर्ष के बच्चों को लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि रूबैला के उपचार के लिए कोई निश्चित इलाज नहीं है इस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण ही एकमात्र उपाय है। अतः सभी बच्चों का टीकाकरण होना बहुत ही जरूरी है। उन्होंने बताया कि टीकाकरण अभियान के अंतर्गत यह टीका राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा स्कूलों में मुफ्त लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि एम0आर0 टीका एक बहुत सुरक्षित टीका है। भारत के अलावा संसार के अन्य कई देश भी अपने करोड़ों बच्चों की सुरक्षा के लिए इसका प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एम0आर0 अभियान सभी जगहों स्कूलों, अस्पताल एवं स्वास्थ्य केंद्रों पर चलाया जाएगा क्योंकि 09 माह से 15 वर्ष तक की आयु वर्ग में अधिकतर बच्चे स्कूलों में पाए जाते हैं इसलिए टीकाकरण अभियान स्कूलों में भी चलाया जाएगा। स्कूल ना जाने वाले बच्चों को समुदाय में आउटरीच गतिविधि के माध्यम से टीकाकरण किया जाएगा। यदि बच्चे को एम0आर0 का टीका न दिया जाए तो बच्चे को खसरा व रूबैला रोग होने का खतरा बना रहता है। बच्चे को इस अभियान में टीका अवश्य ही दिया जाना चाहिए भले ही उसे पहले से एम0आर0/ ए0एम0आर0 का टीका दिया जा चुका हो। यह बच्चे को खसरा व रूबैला रोग के प्रति स्वस्थ रखेगा। स्कूलों में बच्चों का टीकाकरण शिक्षकों की उपस्थिति में किया जाएगा, फिर भी यदि माता-पिता चाहें तो टीकाकरण के समय अपने बच्चे के साथ रह सकते हैं।
बैठक में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी(प्रतिरक्षण), जिला विद्यालय निरीक्षक व संबंधित चिकित्सक एवं सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य/नोडल टीचर आदि उपस्थित थे।