Ad

ads ads

Breaking News

पात्रों को नहीं मिल सका आवास, अपात्र उड़ा रहे मौज



पुरवा/उन्नाव। आजादी के 71 साल बाद भी गरीबी का दंश लाखों परिवार झेल रहे हैं। इस बदहाली का कारण कुछ हद तक सरकारी नीतियां भी हो सकती है किन्तु प्रशासन की भ्रष्ट कार्यशैली का असर सर्वाधिक है। वैसे तो देश के नागरिकों को प्रायः 21वीं सदी के विकास का स्वप्न लोक राजनीतिक दलों द्वारा दिखाया जाता है और यहां का भोला भाला नागरिक उनके उस दिवास्वप्न में फस कर पिसता चला जाता है।
आइए आज आपको हम एक गांव की हकीकत से रूबरू कराते हैं। पुरवा तहसील मुख्यालय से लगभग 13 किमी की दूरी पर स्थित विकास खण्ड असोहा का गांव दरसवा। यहां रहने वालों में अधिकतर गरीबी का दंश झेल रहे हैं। रहने को मकान नहीं, पेट पालने को कोई ठोस रोजगार नहीं और परिवार को भोजन उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त खेती भी नहीं है। इस बार लगातार हुई बरसात से इनके रहने का आसियाना भी छिन गया। वही गांव के गयाप्रसाद पुत्र सुरजू का मकान पूरी तरह बरसात में तबाह हो चुका है। नन्हका पत्नी रामकिसोर का भी मकान गिर चुका है। परिवार में कुल सात सदस्य हैं जो अपने देवर चन्द्रशेखर के मकान में रहने को मजबूर हैं। कोई पड़ोस में तिरपाल लगाकर रह रहा है, तो कोई दूसरे के मकान में। 
 
वही दरसवा के मजरा लोधई खेड़ा का भी वही हाल है। यहां दर्जनों मकान बारिस में ढह गए हैं। किन्तु प्रशासन की नजर यहां अभी तक नहीं पड़ी। भुक्त भोगियों को आशा है कि कोई तो उन्हें आवास दिला दे, जिससे वे स्वयं के साथ-साथ परिवार को सुरक्षित रख सके। यहां अशोक पुत्र स्व० रामस्वरूप, सजीवन पुत्र मंगल समेत दर्जनों ग्रामवासियों के कच्चे घर इसी बरसात में गिर गए हैं। पर इन्हें आवास का लाभ नहीं दिया गया। ग्रामवासियों  ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अपात्रों को प्रधानमंत्री आवास का लाभ दिया गया किन्तु पात्र दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। गांव में विद्युत आपूर्ति सुचारु रूप से नहीं होती है। साथ ही बिजली के खम्भों में लगी लाइटें सिर्फ हाथी दात है। सभी गरीब व असहाय ग्रामीणों का केन्द्र व प्रदेश की सरकार से गुहार है कि आखिर कोई तो बताये, इनके अच्छे दिन कब आएंगे?

...रिपोर्ट - रत्नम चौरसिया। (एडवोकेट)


No comments