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जैन मुनि तरुण सागर का निधन,पीएम समेत कई लोगों ने जताया दुख





        बीमार चल रहे देश के ख्यातिप्राप्त जैन मुनि तरुण सागर जी का शनिवार तड़के निधन।

डेस्क। पिछले कई दिनों से लगातार बीमार चल रहे देश के ख्यातिप्राप्त जैन मुनि तरुण सागर जी का शनिवार तड़के निधन हो गया। वह 51 साल के थे। उन्होंने एक दिन पहले ही संथारा शुरू किया था जिसके बाद आज  तड़के उनका निधन हो गया। उन्होंने शाहदरा के कृष्णा नगर में अंतिम सांस ली। जानकारी के मुताबिक आज 3 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
तरुण सागर जी का जन्म मध्यप्रदेश के दमोह में हुआ था और उन्होंने छत्तीसगढ़ में दीक्षा ले ली थी। उन्हें मध्यप्रदेश में राजकीय अतिथि का दर्जा भी प्राप्त था।

तरुण सागर महाराज के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताते हुए श्रद्धांजलि दी है। प्रधानंमत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि तरुण सागर जी महाराज के अचानक निधन से दुखी हूं। हम उन्हें हमेशा उनके उच्च विचारों और समाज के प्रति योगदान के लिए याद रखेंगे।

बता दें कि 20 दिन पहले उन्हें पीलिया हुआ था। जिसके बाद उन्हें मैक्स अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं देखा जा रहा था। कहा जा रहा है कि जैन मुनि ने इलाज कराने से भी इन्कार कर दिया और कृष्णा नगर (दिल्ली) स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल पर जाने का निर्णय लिया।

अपने क्रांतिकारी प्रवचनों की वजह से तरुण सागर को क्रांतिकारी संत का तमगा मिला हुआ था। उन्हें मध्यप्रदेश शासन ने 6 फरवरी 2002 को और गुजरात सरकार ने 2 मार्च 2003 को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया था। जैन मुनि ने कड़वे प्रवचन नाम से एक बुक सीरिज शुरू की थी। जिसके लिए वह काफी चर्चित रहते थे। उन्होंने कहा था कि यदि कोई शख्स तुम्हारी वजह से दुखी होता है तो समझ लो यह तुम्हरे लिए सबसे बड़ा पाप है। ऐसे काम करो  जिससे लोग तुम्हारे जाने के बाद दुखी होकर आंसू बहाएं, तभी तुम्हें पुण्य मिलेगा।