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भविष्य में कृत्रिम आँख से देख सकेंगें दृष्टि खो चुके मरीज

वैज्ञानिकों ने पहली बार कृत्रिम आंख (बॉयोनिक आई) के नमूने का 3डी प्रिंट निकालने में सफलता हासिल की

डेस्क। वैज्ञानिकों ने पहली बार कृत्रिम आंख (बॉयोनिक आई) के नमूने का 3डी प्रिंट निकालने में सफलता हासिल की है। इसमें लाइट रेसिप्टर (प्रकाश या केमिकल सिग्नल प्राप्त करने वाले) भी लगाया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है भविष्य में बॉयोनिक आई के इस्तेमाल से दृष्टिहीनता के शिकार लोग देख सकेंगे।

घुमावदार सतह पर इलेक्ट्रॉनिक्स को प्रिंट करना मुश्किल माना जाता है। इसी कारण यूनिवर्सिटी ऑफ मिनीसोटा के वैज्ञानिकों ने कांच के अर्धगोलाकार टुकड़े पर कृत्रिम आंख के नमूने का 3डी प्रिंट तैयार किया है। प्रिंट निकालने के लिए विशेष 3 डी प्रिंटर में सिल्वर कणों से बनी स्याही का इस्तेमाल किया गया था। इस स्याही की विशेषता है कि यह बहती नहीं है।

प्रोफेसर माइकल मैक अल्पाइन ने कहा, ''अब तक बॉयोनिक आंख को मात्र एक कोरी कल्पना समझा जाता था। लेकिन हम इसके काफी करीब पहुंच गए है। 3-डी प्रिंटेड अर्धचालक 25 फीसद तक प्रकाश को विद्युत में बदलने में सक्षम है। यह हमारी आश्चर्यजनक सफलता है।'' प्रोफेसर ने यह भी कहा कि अभी बहुत कुछ करना शेष है लेकिन 3.डी प्रिंटेड अर्धचालक ने काम आसान कर दिया है।

आगे के शोध में बॉयोनिक आंख बनाने के लिए अधिक रेसिप्टर वाले नमूने तैयार किए जाएंगे। वैज्ञानिक इसके लिए ऐसे पदार्थ का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं जिसे वास्तविक आंख में प्रत्यारोपित किया जा सके। बता दें कि मैक की टीम ने कुछ वर्षों पहले बॉयोनिक कान भी प्रिंट किया था। उसके बाद से वह सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले कई कृत्रिम अंग का 3.डी प्रिंट बना चुके हैं।

साभार - नई दुनिया।