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ड्रांइविंग लाइंसेस के नाम पर आवेदक लगा रहे महिनों चक्कर

-थक हार कर आवेदको को लेनी पड़ती है दलालों की शरण उन्नाव। देश की सबसे बड़ी लोकसभा व जनसंख्या घनत्व के मामले में भी अन्य जनपदों को काफी पीछे कर
रहे जनपद में ड्रांइविंग लाइंसेस की प्रक्रिया आज भी पहले की तरह ही चल रही है। जिसमें जनपद को दिया गया न तो कोटा ही बढ़ा है, और न ही वहॉ के कर्मियों की संख्या। लगातार बढ़ते वाहनों के लिए जरूरी ड्राइविंग लाइसेंस की एक सीमित दायरे में प्रतिदिन बनने के चलते एक तरफ आवेदको के लिए किसी मुसीबत से कम एआरटीओ नहीं रह गया है। वहीं दूसरी तरफ लगातार बढ़ते वाहनों की आरसी के आवेदनों की भरमार ने आनलाइन व्यवस्था को चरमराकर रख दिया है। आनलाइन व्यवस्था में सीमित लाइसेंस होने की प्रक्रिया ने आम आदमी को उकता दिया है। वहीं जिम्मेदारों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही। जिसके चलते नए ड्राइविंग लाइसेंसों के आवेदनों की स्थिति यह है कि विभाग में आवेदन करने के बाद आगे की प्रक्रिया के लिए लोगों को दो माह तक का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं आरसी की स्थिति यह है कि इसके प्रारूप न आने से करीब ढाई हजार लोग लाइन में लगे हुए हैं। इन समस्याओं को लेकर विभाग के अधिकारी भी खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय को बीते महीनों में पेपरलेस बनाने की मंशा से यहां की सभी आवेदन प्रक्रियाओं को आनलाइन किया गया था। इसी क्रम में ड्राइविंग लाइसेंसों के आवेदनों की प्रक्रिया को भी आनलाइन कर दिया गया। इससे सीधे तौर पर आवेदको को लाभ हुआ। लेकिन समस्या तो जस की तस हीं रही। विभाग में आफलाइन आवेदन करने वालों की संख्या कम हो गई लेकिन, आवेदन करने वालों की परेशानी बढ़ती चली गई। जानकारों की मानें तो हुआ यह कि पहले प्रक्रिया मैनुअल होने से सभी काम अधिकारी आसानी से कर देते थे। जितने भी आवेदन होते थे उन्हें अधिकारी निस्तारित कर देते थे लेकिन, आनलाइन व्यवस्था होने से जिले का कोटा निर्धारित हो गया है। कोटा कम और आवेदन इससे दो से तीन गुना होने से साफ्टवेयर अब इसके आगे की प्रक्रिया को आगे की तिथियां देने लगा। मौजूदा समय में हालात यह हो गए हैं कि आनलाइन आवेदन करने पर जो तिथि मिल रही है वह 50 से 60 दिन बाद की मिल रही है। जिससे लोगों को लर्निंग लाइसेंस के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ रहा है। एक ओर जहां इसे लेकर आवेदक परेशान हैं तो वहीं अधिकारी इस बारे में आनलाइन स्लॉट न मिलने का रोना रो रहे हैं। इसके अलावा कार्यालय में रोज करीब 70 से 80 नए वाहनों और कमोवेश इतनी ही पुराने (ट्रांसफर होने वाले) वाहनों की आरसी बननी होती हैं। इससे कार्यदिवसों में प्रति माह करीब डेढ़ से दो हजार आरसी जारी की जाती हैं। लेकिन बीते डेढ़ माह से आरसी के छपे हुए प्रारूप मुख्यालय से ही न आने के कारण करीब ढाई हजार से अधिक लोगों के वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट फंसे हुए हैं। इसके चलते वाहन डीलर व आवेदक कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वहीं यदि आंकड़ों की बात करें तो 2014 में ग्यारह लाख तेंतिस हजार तीन सौ उन्सठ ने मतदान किया था। जिनमें करीब चालिस प्रतिशत ने मतदान नहीं किया। इस प्रकार से कुल बीस लाख के आसपास मतदाताओ ंकी संख्या वाले जनपद में यदि प्रतिदिन कुछ बीस से पचास ड्रांइविंग लाइंसेस जारी किए जाए तो शायद ही समय पर ड्रांइविंग लाइंसेस जारी हो पाएगे।
तीन हजार से अधिक लाइसेंस धारक काट रहे कार्यालय के चक्कर विभागीय जानकारों की मानें तो इन दिनों नए लाइसेंसों के आवेदनों की संख्या करीब दो हजार पहुंच चुकी है। जबकि एक दिन में 15 से 20 लाइसेंस ही बनाए जा सकते हैं। इससे इन लोगों को दो माह बल्कि कभी-कभी इससे भी अधिक समय लग रहा है।
चेकिग के दौरान चालकों को उठानी पड़ती है शर्मिंदगी नया वाहन खरीदने के बाद जब वाहन स्वामी को चेकिंग के दौरान रोक लिया जाता है तो उसे बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुलिस उससे आरसी की मांग करती है और वह पुलिस को अपनी समस्या बताता है लेकिन पुलिस इसे मानने से इन्कार करते हुए कभी-कभी तो उसका चालान तक कर देती है।

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