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पॉलीथिन बैन को लेकर जिलाधिकारी ने की व्यापारियों संग बैठक

कानपुर। 50 माइक्रॉन से अधिक की कैरीबैग (पॉलीथिन) पर भी प्रशासनिक नजरें टेंढ़ी हो गई है। निर्माता को अब बाकायदा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पंजीयन संख्या प्रिंट करानी होगी। जब तक बोर्ड का पंजीयन नहीं मिलता है, तब तक निर्माता को पॉलीथिन पर अपना नाम व कितने माइक्रॉन का पॉलीथिन है, यह प्रिंट कराना होगा। यह जानकारी पॉलीथिन कारोबारियों के साथ हुई प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में दी गई। बैठक में तमाम बिंदुओं पर कोई हल नहीं निकला तो कारोबारियों ने नाराजगी जताई। 
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत ने उद्यमियों की बैठक बुलाई थी। इसी समय पॉलीथिन से जुड़े कारोबारी वहां पहुंच गए। इस पर पॉलीथिन से जुड़े मुद्दे पर ही चर्चा शुरू हो गई। कारोबारियों ने 50 माइक्रॉन से ऊपर की पॉलीथिन को दिखाकर कहा कि इस पर भी जुर्माना वसूला जा रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि 50 माइक्रॉन से ऊपर की पॉलीथिन पर निर्माता का नाम, कितने माइक्रॉन की पॉलीथिन है, इसकी जानकारी होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पंजीयन नंबर भी होना चाहिए। कारोबारियों ने कहा कि किसी भी पॉलीथिन निर्माता के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पंजीयन नहीं है। इस पर उन्हें सुझाव दिया गया कि वे तुरंत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पंजीयन के लिए आवेदन कर दें। जब तक उन्हें पंजीयन नहीं मिलेगा, इस मुद्दे पर चालान नहीं होगा। बैठक में कारोबारियों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उनके पास 50 माइक्रॉन से ऊपर की जो पॉलीथिन है, उसका क्या करेंगे। एक-एक पॉलीथिन पर इसे प्रिंट नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब अक्टूबर में आप प्लास्टिक की पूर्णबंदी कर रहे हैं तो क्यों प्रिंटिंग मशीन लगाकर अपना खर्च और बढ़ाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि इस पर लिखित तौर पर दीजिए तो शासन तक बात पहुंचाएंगे।

पैक्ड सामग्री ही पैकिंग मैटेरियल में आएगी

पॉलीथिन के कैरीबैग और पैकिंग मैटेरियल को लेकर कारोबारियों और अधिकारियों में काफी असमंजस की स्थिति रही। कुछ कारोबारियों और अधिकारियों ने कहा कि 50 माइक्रान से नीचे के पॉलीथिन कैरीबैग प्रतिबंधित हैं लेकिन पैकिंग सामग्री नहीं। इसको लेकर कई अधिकारियों में भी मत भिन्नता रही। हालांकि जिलाधिकारी ने साफ किया कि ब्रेड, बिस्कुट या जो सामग्री पैक होकर आती हैं, उन्हें ही छूट है। खुद पैकिंग मैटेरियल लेकर उसमें चाय या दही जैसी चीजें पैक नहीं कर सकते।
बैठक में जिलाधिकारी के अलावा एडीएम सिटी सतीश पाल, सिटी मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कुलदीप मिश्रा, उद्यमी मनोज बंका, आलोक अग्रवाल, संजय जैन, ब्रजेश अवस्थी, उमंग अग्रवाल, योगेश पुरवार, ज्ञानेश मिश्रा, हाजी इकलाख मिर्जा, भरत केसरवानी, अनुराग चोखानी, सुधीर विज, अमन गुप्ता, पुनीत गुप्ता, ज्ञानेंद्र गुप्ता, विष्णु डालमिया, जय शर्मा, रवि गुप्ता, दिनेश शुक्ला, शिव कुमार गुप्ता, पीयूष जैन, अभिनव तिवारी, आशीष भार्गव आदि थे।


डीएम ने मनाया बैठक से जा रहे उद्यमियों को
बैठक के दौरान अचानक एक व्यापारी नेता अपने संगठन के बड़े नेताओं की प्रशंसा करने लगे। इससे उद्यमी नाराज हो गए और बैठक छोड़कर चल दिए। इस पर जिलाधिकारी खुद उठ कर गए और सभी उद्यमियों को समझाकर वापस लेकर आए।

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