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गुजरात में प्रतिवर्ष औसतन 9200 महिलाए एंबुलेंस में देती है बच्चों को जन्म।



विकसित राज्य की चर्चाओं के बीच यातायात और 108 की बेहतर व्यवस्था के बावजूद गुजरात में प्रतिवर्ष औसतन 9200 महिलाओं को एंबुलेंस में ही बच्चों को जन्म देना पड़ा है


डेस्क। गुजरात मॉडल और विकसित राज्य की चर्चाओं के बीच यातायात और 108 की  व्यवस्था के बावजूद गुजरात में प्रतिवर्ष औसतन 9200 महिलाओं को एंबुलेंस में ही बच्चों को जन्म देना पड़ा है। अधूरी स्वास्थ्य सुविधा, टूटी सड़कों और ट्रैफिक जाम जैसी असुविधा को इसका जिम्मेदार बताया जा रहा है। वर्ष 2018 के अप्रैल और मई के दो महीनों में ही 48 महिलाओं ने सड़कों पर ही नवजात को जन्म दिया।
आपातकालीन सुविधा 108 के आकंड़ों के अनुसार, गत महीने पालनपुर और दांता में रोड पर ही प्रसूति के आंकड़े बहुत ज्यादा हैं। वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2018-19 के अप्रैल-मई तक दाहोद जिल में सर्वाधिक 1856 महिलाओं की प्रसूति 108 की वैन में सड़क पर ही हो गई। इसी समय के दौरान कच्छ में 1711, अमरैली में 1495 और नर्मदा जिले में 1414 महिलाओं को रोड पर ही प्रसूति के लिए मजबूर होना पड़ा।
विशेषज्ञों की मानें तो दूरवर्ती क्षेत्रों में गायनेक की सुविधा के अभाव में ऐसा होता है। इन क्षेत्रों में गायनेक सहित हेल्थ सेंटर भी नहीं होते। ऐसे समय प्रसूति के समय ही वे घर से निकलती हैं, इसलिए रास्ते में ही प्रसूति हो जाती है। इसके अतिरिक्त दूरगामी इलाकों मे टूटी-फूटी सड़कें भी गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी पैदा करती हैं।
मई में मोरबी के चराडवा गांव की एक महिला को उसके परिजन डिलीवरी के लिए कार में ले जा रहे थे। वे ट्रैफिक में फंस गए। इससे कार में ही उसने बच्चे को जन्म दिया। अहमदाबाद जिले में 2015-16 में 9570, 2016-17 में 431, 2017-18 में 399 और 018 में अप्रैल और मई के दो महीने में 54 महिलाओं ने रोड पर ही बच्चों को जन्म दिया। इसी प्रकार गत वर्ष जाफराबाद के लुणासपुर गांव की महिला को 108 द्वारा प्रसव के लिए ले जाया जा रहा था, उस समय 12 सिंहों ने रास्ता रोक दिया। इससे महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दिया।
पिछले साल जाफराबाद के लुणासपुर गांव की वाड के क्षेत्र में महिला को प्रसव पीड़ा होने से उसे 108 एंबुलेंस द्वारा जाफराबाद के एक अस्पताल में ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में जंगल का इलाका होने की वजह से 12 शेरों ने उनका रास्ता रोक दिया। ये शेर एंबुलेंस के आगे बैठ गए थे, जिसके कारण एंबुलेंस आगे नहीं जा सकी थी। करीब 30 मिनट तक ये शेर एंबुलेंस के आगे बैठे रहे थे। इस दौरान महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दिया था।
जिला 2015-16 2016-17 2017-18 2018-19 कुल
दाहोद 735 576 473 72 1856
कच्छ 494 548 589 80 1711
अमरैली 433 498 507 57 1495
नर्मदा 411 437 508 58 1414
सूरत 466 343 424 71 1304
राजकोट 399 395 426 39 1259
भरुच 419 356 407 49 1231
सुरेन्द्रनगर 336 362 345 53 1096
छोटाउदयपुर 379 268 301 63 1011
गुजरात में रोड पर प्रसूति की घटना
वर्ष - घटना
2015-16 9570
2016-17 9022
2017-18 9225
2018-19 1269 (अप्रैल मई तक के आंकड़े)
अहमदाबाद जिला में रोड प्रसूति की घटना
वर्ष - प्रसूति की घटना
2015-16 431
2016-17 399
2017-18 465
2018-19 54 (अप्रैल मई तक के आंकड़े)
कुल 1349

.... साभार - नई दुनिया