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पुलिस और वन विभाग की मिलीभगत से कट रहे प्रतिबंधित पेड



निघासन-खीरी।
इलाके में वन विभाग की सरपरस्ती में प्रतिबंधित सेमल व हरे आम के पेड़ो का कटान चरम सीमा पर चल रहा हैं,वहीं रात में काटे गये पेडों की निकासी होती हैं,तथा इसमें डायल हंड्रेड की भी भूमिका अवैध वसूली में बताई जा रही हैं।
इलाके की निघासन, रोलीपुरवा व सिसैया में विनियर मशीनों पर बिना कागजी खानापूर्ति के सेमल के बोटों से प्लाई निकालकर लखनऊ, बरेली,बदायूं, आगरा,पीलीभीत तथा सीतापुर आदि जगहों पर इसकी सप्लाई की जा रही हैं।वहीं लकड़ी माफिया एक बार रवन्ना व परमिट बनवाकर उसी कागजों पर महीनों सैकड़ों हरे पेडों का कटान करवाते रहते हैं।इन लकडी माफियाओं को ओवरलोडिंग से भी कोई मतलब नहीं होता हैं,जिससे रात को ही लकडी के बोटों अपने स्थान पर पहुंचा रहे हैं,वहीं सूत्र बताते हैं कि लकडी माफियाओं से रात में ड्यूटी पर लगी डायल हंड्रेड भी अवैध वसूली करने से पीछे नहीं हैं।गत् दिनों लालपुर डिग्री कालेज के सामने हजारों कुंतल आम के पेडों को काटकर रखा गया था,जिसकी सूचना भी ग्रामीणों ने वन विभाग व क्षेत्रीय पुलिस को दी गयी थी,जिसको लकड़ी माफिया रातों रात हरे आम के बोटों को ट्रकों में भर कर उनकी निघासन-खीरी।
के निघासन, रोलीपुरवा व सिसैया में विनियर मशीनों पर बिना कागजी खानापूर्ति के सेमल के बोटों से प्लाई निकालकर लखनऊ, बरेली,बदायूं, आगरा,पीलीभीत तथा सीतापुर आदि जगहों पर इसकी सप्लाई की जा रही हैं।वहीं लकड़ी माफिया एक बार रवन्ना व परमिट बनवाकर उसी कागजों पर महीनों सैकड़ों हरे पेडों का कटान करवाते रहते हैं।इन लकडी माफियाओं को ओवरलोडिंग से भी कोई मतलब नहीं होता हैं,जिससे रात को ही लकडी के बोटों अपने स्थान पर पहुंचा रहे हैं,वहीं सूत्र बताते हैं कि लकडी माफियाओं से रात में ड्यूटी पर लगी डायल हंड्रेड भी अवैध वसूली करने से पीछे नहीं हैं।गत् दिनों लालपुर डिग्री कालेज के सामने हजारों कुंतल आम के पेडों को काटकर रखा गया था,जिसकी सूचना भी ग्रामीणों ने वन विभाग व क्षेत्रीय पुलिस को दी गयी थी,जिसको लकड़ी माफिया रातों रात हरे आम के बोटों को ट्रकों में भर कर उनकी निकासी भी करवा दी गयी।और वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया की यह हरें आम के पेड़ो का परमिट बना था,पर वह यह नहीं बताये कि कितने हरे आमों के पेड़ो का परमिट बना।यही नहीं अवैध कमाई के चक्कर में जहाँ इलाके में हरियाली समाप्ति की ओर हैं,वहीं सरकारें करोड़ों रुपयें खर्च कर हरियाली पर जोर शोर से अपना काम कर रही हैं।निघासन‌ में लगी विनियर मशीनों पर भी प्रतिबंधित हरे सेमल के पेडों की प्लाई बनाकर जहां हरियाली का खात्मा कर रहे वहीं राजस्व को भी हानि पहुंचाकर खुद मालामाल हो रहे हैं।जिससें इलाके के वन प्रेमियों में खासा रोष व्याप्त हैं।


क्षेत्र में बिना परमिट के हरे पेडों का कटान नहीं हो रहा हैं,केवल रोगग्रस्त व सूखें पेडों का ही विभाग से परमिट जारी होता हैं,इसमें क्षेत्रीय लेखपाल की भी रिपोर्ट लगती हैं।यदि अवैध वन कटान होता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।

  ....पल्टूराम राना
रेंजर दक्षिण वन विभाग निघासन

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