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कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुयी भूजल सप्ताह गोष्ठी




     लखीमपुर-खीरी। बुधवार को जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में भूजल सप्ताह गोष्ठी आयोजित हुयी। जिसमें मुख्य विकास अधिकारी रवि रजंन, विधायक सदर योगेश वर्मा, एमएलसी शंशाक यादव, प्रगतिशील किसानों एवं जिला स्तरीय अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। 

      गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुये जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह ने भूजल, प्रबन्धन, वर्षा जल संचयन एवं भूजल रिचार्ज की विस्तृत जानकारी देते हुये बताया कि जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। जल प्रकृति का अनिवार्य घटक है। स्वच्छ जल मानव, पशु पक्षी जीव जन्तु और वनस्पतियों की जीवन रक्षा के लिये अति आवश्यक है। प्रकृति के इन बहुमूल्य उपहार और अनमोल संपदा का संरक्षण हमारा नैतिक दायित्व है, इसलिये इसका अपव्यय न करें। 

      मुख्य विकास अधिकारी रवि रंजन ने कहा कि जल प्रकृति का वह अनुपम उपहार है जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। पृथ्वी का दो तिहाई भाग जल से घिरा है फिर भी शुद्ध जल की मात्रा सीमित है। साथ ही उन्होनें बताया कि अपनी जीवन प्रणाली को उचित दिशा में विकसित करें और जल स्त्रोतों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझे तो अपने ही बल बूते पर हम जल की कई समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

 जिला प्रशिक्षण अधिकारी ने भूजल सप्ताह गोष्ठी का संचालन करते हुये सदन को अवगत कराया कि भूजल संरक्षण हेतु पूरे प्रदेश में भूजल सप्ताह मनाया जा रहा है जिसका उद्देश्य भूजन दोहन और वर्षा जल के संरक्षण की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुये जनजागरण चलाया जाये क्योंकि पानी के इसी प्रकार दोहन तथा संरक्षण की कमी से पानी की पूरी आवश्यकता हेतु भविष्य में पूरा किया जाना सम्भव न हो सकेगा।

उप कृषि निदेषक एलबी यादव ने मृदा संरक्षण पर बल देते हुये बताया कि वर्षा ऋतु में अतिवृष्टि होने पर खेत की मिटटी बहकर दूसरे खेत में अथवा नदी, नालों में चली जाती है जिससे खेत की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। अतः खेतों की मेड़ बंदी का कार्य ससमय कराना चाहिये ताकि मृदा संरक्षण के साथ-साथ वर्षा ऋतु का पानी खेतों में ही संरक्षित हो जाये।

जिला उद्यान अधिकारी दिग्विजय कुमार ने जल संरक्षण पर बल देते हुये बताया कि खेतों में फसलों की सिंचाई आवश्यकतानुसार ही की जाए और ऐसी फसलों को बढ़ावा दिया जाये जिसमें सिंचाई हेतु पानी की कम खर्च हो। इससे भी भूजल अत्याधिक दोहन से बचा जा सकता है।

जिला गन्ना अधिकारी बीके पटेल ने भूजल संरक्षण पर रैन वाटर सिस्टम का प्राविधान आवश्यक रूप से कराया जाये जिससे वर्षा जल जो छतों से आता है वो संरक्षित हो सके।

प्रगतिशील किसान डा0 बेनी सिंह ने भूजल संरक्षण पर विचार व्यक्त करते हुये कहा कि फसलों में जैविक खाद का प्रयोग करके भी सिंचाई में पानी बचत की जा सकती है और उत्पादन में भी वृद्धि होगी।

अन्त में लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियन्ता सीएल जासवाल ने गोष्ठी में उपस्थित  अधिकारियों एवं कर्मचारियों और माननीय जनप्रतिनिधियों को गोष्ठी में भाग लेने तथा गोष्ठी को सफल बनाने के लिये धन्यवाद देते हुये कहा कि प्रकृति जो हमें देती है उसे हम अपना न समझते हुये आने वाली पीढ़ी की अमानत समझे तो हमारा वर्तमान व भविष्य दोनो ही सुख समृद्धि से पूर्ण हो जायेगा।

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