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खेत मे हल चलाती है बेटियां ।


- एक बीघा कृषि भूमि और सूखे की मार में किसान हल तो ले आया,बैल नहीं है। 
- गांव के दूसरे किसानों से बैल मांगकर करता है खेती। 
- मऊरानीपुर के किसान नेता शिवनारायण सिंह परिहार के पास आवास,शौचालय की मदद मांगता है। किसान नेता सरकारी व्यवस्था के आगे बेबस। 

झांसी यूपी बुन्देलखण्ड के जिला झांसी का यह सीमांत किसान अच्छेलाल है। झांसी तहसील की मउरानीपुर के गांव बड़ागांव में सूखे से परेशान किसान अच्छेलाल ने अपनी दो बेटियों को खेत मे बैल बना दिया है। वह आजकल मानसून की आवक पर अपनी बच्चियों के साथ खेत मे हल चला रहा है। दो जून की रोटी का बंदोबस्त और सालभर के फांके की चिंता में इस किसान को ये कदम उठाना पड़ा है। किसान के पास न तो पीएम आवास है और न दावों की पोल खोलता शौचालय। किसान नेता शिवनारायण सिंह परिहार बतलाते है कि अच्छेलाल की 6 बेटियां है जमीन एक बीघा है । पिछले कई साल से बारिश खेल खेलती है।  अच्छेलाल के अच्छे दिन लाने वाले पानी ने गत 2 साल से मुंह मोड़ रखा है। उधर सरकारी योजनाओ का भी लाभ नही मिला । बदहाली में बसर करते इस किसान ने अपनी कुछ बेटियों की शादी दूसरों से मदद मांगकर की है। प्रधानमंत्री जी देश में किसानों के साथ आपकी और पिछली सरकारों ने जो विकास किया है, फसल उत्पादन, कर्जमाफी की है यह उसकी बानगी है। कबीर तो मगहर में मुक्त हो गए आप काशी जाकर भी इनके प्रकोप से मुक्ति नहीं पा सकेंगे क्योंकि देश की जनता रुपये,वादे,नारे और ठहाके नहीं रोटियां ही खाएगी।

.... आशीष सागर, बांदा उत्तर प्रदेश

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