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रेलवे विभाग अब कर्मचारी की दूसरी पत्नी की संतान को भी देगा नौकरी



 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली पत्नी के होते हुए दूसरी शादी से पैदा होने वाली संतान को पिता के अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता है।   

डेस्क। रेलवे विभाग ने कर्मचारी की मौत पर उसकी दूसरी पत्नी के बेटे को अब अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का फैसला किया है। रेल प्रशासन ने केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश पर यह व्यवस्था शुरू कर दी है। रेलवे विभाग में अभी तक पहली पत्नी के जीवित रहते या उससे बिना तलाक लिए दूसरी शादी करने को रेलवे मान्यता नहीं देता था। ऐसे हालात में दूसरी पत्नी की संतानों को लाभ नहीं मिल पाता था।
देश में ऐसे केस लगभग 10 हजार से ज्यादा हैं। जिनमें रेलवे कर्मचारियों की मौत के बाद दूसरी पत्नी की संतानों को नौकरी नहीं मिली है। रेलवे नियम के अनुसार पहली पत्नी के जीवित रहते या बिना उससे तलाक लिए दूसरी शादी करने पर दूसरी पत्नी व उसकी संतान को कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती हैै। लिहाजा रेल कर्मियों की मौत के बाद दूसरी पत्नी की संतान को नौकरी नहीं मिल पाती थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली पत्नी के होते हुए दूसरी शादी से पैदा होने वाली संतान को पिता के अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता है।
कैट ने पहले दूसरी पत्नी की संतान को पिता के स्थान पर नौकरी देने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ रेलवे बोर्ड के अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे के तर्क को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली पत्नी के होते हुए दूसरी शादी से पैदा होने वाली संतान को पिता के अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता है। इसलिए दूसरी पत्नी के संतान को नौकरी देनी चाहिए। कोर्ट ने कैट के फैसले को सही ठहराया। रेलवे बोर्ड के निदेशक इस्ट एन आइ नीरज कुमार ने 21 मई को पत्र जारी कर कैट के आदेश को लागू कर दिया है। साथ ही दो जनवरी 1992 के उस सर्कुलर को रद कर दिया जिसमें दूसरी पत्नी के बच्चों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की मनाही थी। मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल ने बताया कि रेलवे बोर्ड का आदेश मिल गया है। कार्मिक अनुभाग को इस आदेश का पालन करने के लिए कहा गया है।

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