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अधिकारियो की शह पर प्रधान ने अपात्रों के नाम किए पट्टे

उन्नाव। तहसील प्रशासन की मिलीभगत से तहसील बांगरमऊ के अन्तर्गत रोशनाबाद पोस्ट बेवली इस्लामाबाद में ग्राम प्रधान ने पैंसठ पट्टे अवैध तरीके से भाई-भतीजों रिश्तेदारों दोस्तों के बीच बांट दिया। जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
जानकारी के अनुसार भूमिहीन मजदूर गरीब पात्रों को लेकर चलाए जा रहे भूमि पट्टा योजना को अपनों के बीच बांट कर गांव के प्रधान ने सारी योजना का मटियामेट कर दिया। ग्रामीणों की माने तो भूमिहीन मजदूर गरीब पात्रों से पचीस हजार रूपए से लेकर पचास हजार रूपए रिश्वत की रकम के रुप में लेखपाल व ग्राम प्रधान कन्हैया लाल ने खुलेआम चला रखी थी। वहीं रिश्वत की रकम पूरी न होने पर गरीब पात्रो को दरकिनार कर नियम कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर ग्राम प्रधान ने अपने ही परिवार के ग्यारह सदस्यों के नाम पट्टा कर दिया,पट्टा करते समय ऐसे-ऐसे लोगों को चिन्हित किया गया। जिनके पास कई मंजिला पक्के मकान वाहनों में कार बाइक के साथ साथ उद्योग आदि है। तहसीलदार व एसडीएम को एक वर्ष से गरीब ग्रामीण प्रार्थनापत्र देकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं, इसके बावजूद भी किसी प्रकार की संबधित लोगों के खिलाफ कोई कारवाई नहीं हो सकी। सूत्रों की माने तो  शिकायती पत्र देने वालो के खिलाफ अपराधियों को लगा दिया गया। जो उन्हे आए दिन जान से मार देने की धमकी दिया करते है।

अपनो के नाम किए पट्टे
ग्राम प्रधान कमला के प्रतिनिधि पति कन्हैयालाल पाल ने संबधित अधिकारियों की शह पर 91 पट्टों में 70 पट्टे अपने ही बिरादरी के लोगों के कर दिए। जिनमें अधिकांश सम्पन्न होने के बावजूद षड़यन्त्र के चलते पट्टाधारक हो गए। पूरे घटना क्रम में सबसे दिलचस्प तो यह है कि ग्राम प्रधान ने जिला हरदोई के रहने वाले दामाद के नाम भी पट्टा कर दिया। वहीं अन्य ग्यारह परिवारीजनों के नाम भी अवैध तरीके से पट्टा होने की जानकारी प्राप्त हुई है। जो कि जमीनी स्तर पर पूरी तरह से धोखाधड़ी के अन्तर्गत आते हैं। यही नहीं संबधित अधिकारियों की नाक के नीचे सबकुछ होता रहा उसके बावजूद उन्होने पूरे मामले को लेकर चुप्पी साध रखी। ग्रामीणों ने जब इसकी शिकायत संबधित अधिकारियो से की तो उन्होने शिकायतकर्ता ग्रामीणों को ही हड़का कर व मामले को बिना वजह बता कर चलता कर दिया। वहीं जब लेखपाल से पीड़ित ग्रामीण मिले तो लेखपाल ने यह कह उन्हे चलता कर दिया कि उनकी शिकायतों से उसका आफिस भर चुका है, ऐसे सवाल उठता है कि पीड़ित ग्रामीण न्याय मांगे तो किससे क्योंकि जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री के दर पर न्याय की गुहार लगा चुके हैं। न्याय मिलना तो दूर की बात है, अभी दोषियों पर कार्यवाही शुरू भी नहीं हुई है। अब इसे गरीब किसानों का दुर्भाग्य कहें या भ्रष्टतंत्र की निशानी खैर जो भी है पात्र किसान परेशान हैं उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

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