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कोर्ट ने दुष्कर्मी को दिया आजीवन कारावास



उन्नाव। अदालत  ने दुष्कर्म के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए दुष्कर्मी को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 12000 रुपये का जुर्माना भी किया। पास्को अदालत के विद्वान विशेष न्यायाधीश द्वारा उक्त आदेश सुनाया गया। 
बतादे कि दुष्कर्म की घटना विगत 16 मार्च 2016 की है जब एक फेरी लगाने वाले मोटरसाईकिल  सवार ने 5 वर्षीय मासूम को उस समय अपने साथ ले गया था। जब मासूम अपने घर के सामने खेल रही थी। उसे बिस्कुट खिलाने के बहाने से खेत ले गया। जहा दुष्कर्मी ने मुंह काला किया। और दूसरे दिन मासूम सड़क किनारे खून से लथपथ रोते हुए मिली थी। अनजान व्यक्ति द्वारा सड़क पर पड़ी मासूम को देखकर पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने मासूम को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया।
इसके पूर्व उक्त मासूम के परिजनों द्वारा अचलगंज थाना में बिटिया की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इधर तात्कालीन विद्वान पूर्वाधिकारी द्वारा उपलब्ध सामग्री के आधार पर अपराध को संज्ञान लेते हुए अभियुक्त को आहूत किया। जिसका निर्णय आज विद्वान न्यायाधीश न्यायालय स्पेशल जज लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण का अधिनियम अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा दिया गया।

बतादे कि अचलगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में मोटरसाइकिल से फेरी लगाने वाला सुभाष सोनी निवासी शुक्लागंज थाना गंगाघाट ने (5) वर्षीय मासूम को बिस्कि ट खिलाने के बहाने उस समय अपने साथ ले गया। जब मासूम के मां बाप खेतों में काम करने के लिए गए थे। वापसी में जब परिजनों को उनकी बिटिया नहीं मिली। तो उन्होंने खोजबीन करना शुरू किया। इस बीच मासूम को ले जाते हुए गांव के ही रहने वाले एक व्यक्ति ने सुभाष सोनी को देखा था। मासूम की खोजबीन की गई। नहीं मिलने पर परिजनों ने इस संबंध में थाना अचलगंज में तहरीर दी और गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया। दूसरे दिन मासूम सड़क किनारे खेत में खून से लथपथ मिली। जिसकी जानकारी मौके पर खड़े व्यक्ति ने पुलिस को दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने मासूम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए कानपुर रेफर कर दिया गया था।
इधर अदालती कार्रवाई के बाद विशेष न्यायाधीश पास्को ने अपना निर्णय सुनाते हुए सुभाष सोनी को 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण 2012 के अंतर्गत दोषी पाया। जिसे दंडस्वरूप 10,000 का जुर्माना और आजीवन शास्त्र कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही धारा 363 के अंतर्गत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 2000 का अर्थदंड लगाया गया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में क्रमशा 2 और 1 साल का अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही विद्वान न्यायाधीश ने जुर्माना राशि का 50  पीड़िता को पति  को कर के रूप में देने का आदेश दिया है।

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