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बेस्ट म्युचुअल फंड SIP चुनने के लिए अपनाएं ये तरीके

डेस्क। क्या आप म्युचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करने का सोच रहे हैं। इसके लिए सबसे बेहतरीन तरीका म्युचुअल फंड एसआईपी है। एसआईपी के जरिए आप हर महीने एक निश्चित रकम म्युचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। लंबे समय में इससे बड़ा रिटर्न मिलता है। अगर आप किसी म्युचुअल फंड में एसआईपी करना चाहते हैं तो फंड का चुनाव सावधानी से करें। एसआईपी के लिए फंड चुनते समय ये बातें ध्यान रखेंगे तो बेहतर फंड चुन पाएंगे। किसी को भी सफलता एक मिनट में नहीं मिलती। इसके लिए कड़ी मेहनत और इंतजार करना पड़ता है।
 अगर आप अमीर बनना चाहते हैं दौलत कमाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको योजना बनानी होगी। अगर कोई आपको शॉर्टकट में अमीर बनाने के लिए कह रहा है तो आपके साथ धोखा होने की पूरी उम्मीद है। लंबे समय में मोटा पैसा कमाने के लिए आपके पास योजना होनी चाहिए। म्युचुअल फंड एसआईपी एक ऐसी ही योजना है जिससे आप लंबे समय में पैसा कमा सकते हैं। इसमें आप 500 रुपए से निवेश कर शुरुआत कर सकते हैं। आपको एसआईपी चुनते समय ये बातें ध्यान रखनी चाहिए।

कौन सी एसआईपी बेस्ट है?
यह सवाल आमतौर पर पहली बार निवेश कर रहे निवेशकों द्वारा पूछा जाता है। उन्हें इस बात का ज्ञान नहीं होता कि सिप केवल म्युचुअल फंड्स में निवेश करने के एक माध्यम के रूप में कार्य करते हैं। अच्छे और बुरे सिप जैसा कुछ नहीं होता, बल्कि प्रमुख उद्देश्य निवेश के लिए सबसे बेहतरीन म्युचुअल फंड योजनाओं का चुनाव एवं लम्बे समय के वित्तीय लक्ष्यों के लिए पर्याप्त संपत्ति जमा करना है। अतः सही म्युचुअल फण्ड योजनाओं में निवेश करने का निर्णय सिप एसआईपी से सही फायदा उठाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
कैसे चुनें बेस्ट म्युचुअल फंड?
कई लोग निवेशकों को विश्वसनीयता की जांच करने के लिए म्युचुअल फंड की रेटिंग्स देखने की सलाह देते हैं। पर असल में, रेटिंग्स केवल सिक्के का एक पहलू है (अन्य मानदंड जैसे रिटर्न्स, रिस्क एवरेज एयुएम (।न्ड) आदि एवं दूसरा पहलू (अर्थात गुणात्मक मानदंड) नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसके अलावा रेटिंग्स वन फिट्स ऑल दृष्टिकोण पर काम करते हैं जो असल जीवन में लागू नहीं होता, क्योंकि निवेश एवं वित्तीय योजना निजी गतिविधियाँ हैं एवं हर व्यक्ति की स्थिति में यह अलग अलग होता है। रेटिंग्स निवेश के योग्य फंड्स के गुणों की पहचान करने का शुरूआती रास्ता हो सकते हैं, पर केवल उनपर निर्भर रहने से फायदे की गारंटी देना मुश्किल होता है।
पिछले प्रदर्शन पर दे ध्यान
म्युचुअल फंड का विश्लेषण करने की स्थिति में पिछला प्रदर्शन सबसे प्राथमिक एवं महत्वपूर्ण कारक होता है, पर फंड के विश्लेषण का यह एकमात्र महत्वपूर्ण कारक नहीं है। यह बदल भी सकता है एवं क्योंकि प्रदर्शन तेजी से बदलती बाजार की स्थिति के कारण खुद को बनाए रखने में सफल हो भी सकते हैं एवं नहीं भी, अतः तुलना के आधार के रूप में इसका प्रयोग प्रस्तावित नहीं है। फिर भी यह बात ध्यान देने योग्य है कि पूर्व में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले फंड्स की पूर्व में औसत प्रदर्शन करने वाले फंड्स के मुकाबले भविष्य में अच्छा करने की बेहतर संभावना होती है।
बेंचमार्क से करें तुलना
केवल फंड के प्रदर्शन का विश्लेषण करने भर से असल छवि निकलकर सामने नहीं आएगी। अतः चुने हुए फंड्स की इनके बेंचमार्क इंडेक्स एवं अन्य फंड्स के साथ तुलना करके ही अर्थपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। समयावधि भी एक महत्वपूर्ण कारक होता है। म्युचुअल फण्ड योजनाओं में लम्बे समय की प्रतिबद्धता शामिल होती है, अतः निवेशकों के लिए फंड्स के लम्बे समय के लिए प्रदर्शन का आंकलन करना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।
रिटर्न को ही आधार न बनाएं
कई लोग केवल यह सोचकर एक फंड का चुनाव  करते हैं कि इसने काफी अधिक रिटर्न्स प्रदान किये हैं, और इस चक्कर में अपनी निवेश योजना पर पानी फेर देते हैं। विशेषज्ञों की राय में, निवेश का यह तरीका अनुचित एवं अपूर्ण होता है। रिटर्न्स के अलावा आपको जोखिम मापदंड को ध्यान में रखना पड़ता है एवं उच्च रिटर्न्स भी देखना पड़ता है।
फंड को कौन चला रहा है
म्युचुअल फंड योजना का प्रदर्शन इसके संचालन के तरीके से काफी हद तक जुड़ा है, एवं इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि फंड संचालन टीम बाजार में आ रहे चढ़ाव एवं उतार से निपटने हेतु पर्याप्त अनुभवी एवं सक्षम हों। फंड्स के खराब प्रदर्शन का ठीकरा फंड संचालक की प्रदर्शन क्षमता पर ना फोड़ें, क्योंकि ऐसा हो सकता है कि उन्होंने किसी समय कंपनी छोड़ दी हो एवं आपको एक ऐसी टीम के साथ छोड़ गए हों जो पहले की तरह प्रदर्शन ना कर पा रही हो। अतः, आपका ध्यान पूर्णतः उन फंड केन्द्रों पर होना चाहिए जिनकी प्रणालियाँ एवं प्रक्रियाएं मजबूत हों एवं जो केवल संचालकों के प्रदर्शन पर निर्भर ना हो।
फंड में निवेश की लागत कितनी है
यदि किसी फंड के मुकाबले कोई और फंड तुलनात्मक रूप से कम लागत पर उपलब्ध है एवं दोनों के प्रदर्शन में काफी बारीक अंतर है, तो महंगे फंड्स में निवेश करना समझदारी नहीं है। आसान शब्दों में कहा जाए तो एक एएमसी के लिए अधिक मुनाफे की इच्छा के अतिरिक्त ज्यादा लागत उठाने का कोई कारण नहीं है। हमेशा कम लागत अनुपात के फंड्स में निवेश करें जिससे कि आप वहाँ लम्बे समय तक निवेश कर सकें।
डायरेक्ट प्लान का चुनाव करें
म्युचुअल फंड्स में किये गए निवेश से बड़ा लाभ उठाने के लिए रेगुलर प्लान्स की बजाय डायरेक्ट प्लान्स का चुनाव करें। उपरोक्त बिन्दुओं से साफतौर पर यह पता लगता है कि म्युचुअल फंड्स में निवेश करते समय रेगुलर प्लान की बजाय डायरेक्ट प्लान लेना सुनिश्चित करें।  ऐसा मुख्य रूप से इनकी कम लागत एवं लागत अनुपात की वजह से है, कि डायरेक्ट प्लान्स प्रति वर्ष 0.5ः से 1.0ः तक का अतिरिक्त रिटर्न प्रदान करते हैं।
डायरेक्ट प्लान्स के साथ म्युचुअल फण्ड विक्रेताध्एजेंटध्रिलेशनशिप मैनेजर की सेवाएं हट जाएंगी एवं लेनदेन या तो ऑनलाइन मोड पर अथवा निजी रूप से रजिस्ट्रार या एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कार्यालय जाकर संपन्न होता है।  यह शुरुआत में उतना बड़ा प्रतीत नहीं होता, पर इन छोटी बचतों से आगे जाकर काफी बड़े लाभ प्राप्त होते हैं।
रचित चावला, सीइओ, फिनवे कैपिटल

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