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पुलिस टॉर्चर से युवक की मौत, गुस्साए ग्रामीणों ने किया सड़क जाम

लखनऊ - चंचल हत्याकांड में पूछताछ के लिए हिरासत में लेकर दो भाइयों को पुलिस ने इतना ज्यादा पीट दिया कि एक ने दम ही तोड़ दिया। और दूसरे भाई के शरीर पर भी गहरे जख्म हैं। घटना से गुस्साए लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रायबरेली रोड जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। मौके पर पहुंचे एसएसपी दीपक कुमार ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पीजीआई के डूडा कॉलोनी में रहने वाले मोहम्मद सईद ने बताया कि आशियाना पुलिस ने 24 अप्रैल को चंचल हत्याकांड में पूछताछ के लिए उनके बेटे जियाउल कमर (24) उर्फ कमरू और जियाउल हुसैन (22) को बुलाया था। आरोप है कि हिरासत में पुलिस ने दोनों को जमकर पीटा। 27 अप्रैल को पुलिस ने जब उन्हें छोड़ा तो उनके शरीर पर गहरे चोटों के निशान थे। घर के पास ही एक निजी नर्सिंग होम में उनका इलाज चल रहा था।
इसी बीच तीन मई गुरुवार की रात 10:30 बजे के करीब जियाउल कमर की मौत हो गई। जियाउल के मौसा सकील अहमद ने बताया कि मैं सभासद रमेश कुमार रावत के साथ दोनों भाइयों को लेकर आशियाना थाने पहुंचा था। जिसके बाद दरोगा ने दोनों भाइयो को दूसरी गाड़ी से लेकर चले गए। सकील ने बताया कि तीन दिन बाद जब पुलिसवालो ने उन्हें छोड़ा तो शरीर पर चोट के गहरे निशान थे। जिसपर कमरू से पूछा गया कि किसने पीटा तो उसे पता ही नहीं था कि पुलिस उसे लेकर कहां गई थी और किस पुलिसवाले ने उसकी पिटाई की।
घटना से गुस्साए परिवारीजन और डूडा कॉलोनी के लोग सड़क पर उतर आए। रायबरेली रोड पर शव रखकर सभी ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। आशियाना पुलिस के खिलाफ लोग कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के कारण रायबरेली रोड पर लंबा जाम लग गया है। पीड़ित भाई बोला सीओ मैडम की मौजूदगी में पुलिस वालों ने मारा पीड़ित भाई जियाउल हुसैन ने बताया कि पुलिस वालों ने कहा कि कि अगर कोई मुल्जिम नहीं मिलेगा तो तुम्हें मार डालेंगे। उसने कहा कि उन्हें अंसल चौकी ले जाया गया था। जहां सादी वर्दी में पुलिस ने उन्हें मारा। वह पुलिसकर्मियों को पहचानता तो है लेकिन उनका नाम नहीं जानता। हुसैन ने बताया कि सीओ मैडम की मौजूदगी में पुलिस वालों ने हमको बहुत पीटा। उसने कहा कि दो दिन तो हम दोनों भाई साथ थे लेकिन तीसरे दिन कमरू को पता नहीं कहां लेकर चले गए। मौके पर पहुंचे एसएसपी दीपक कुमार ने कहा कि मामले की गहनता से जांच की जाएगी। शव को पोस्टमार्टम भी कराया जाएगा। अगर जांच में पुलिस की प्रताड़ना और पिटाई से मौत की बात सामने आती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जो भी पुलिसकर्मी दोषी मिलेंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

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