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बीमारी के चलते नहीं ल‍िख पाती थी एक भी अक्षर, लेकिन हौसला यूं की रचा इत‍िहास



डेस्क। UP Borad 2018 की परीक्षा के Result घोषित हो चुके है, जिसमें ढेर सारे बच्‍चों ने टॉप कर अपने माता-पिता, स्‍कूल और जिले का नाम रौशन किया है। इसी कामयाबी की लिस्‍ट में एक और नाम जुड़ा है 17 साल की उमारा काजिसने न सिर्फ कड़ी मेहनत बल्कि अपने हौसलों के दम पर 12वीं में 86.6 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं । उमरा अपनी जैसी दूसरी लड़कियों के लिये मिसाल से कम नहीं हैक्‍योंकि वह 'राइटर्स क्रैम्प' नामक बीमारी की शिकार हैं। अपने मजबूत इरादों को उसने बीमारी के चलते डिगने नहीं दिया। 
तस्वीर साभार: BCCL
दरअसल छोटी सी उमारा को इस बीमारी की वजह से कलम पकड़ कर लिखने में दिक्‍कत होती है। लेकिन फिर भी उमरा ने हार नहीं मानी और जो चाहा वो करके दिखाया। राइटर्स क्रैम्प, हाथ में एक ऐसी ऐंठन को कहते हैं जिससे इंसान को लिखने में परेशानी होने लगती है। इसकी वजह से हाथो की गति धीमी हो जाती है और लिखावट सही नहीं आती। उमरा की बीमारी को चार अलग अलग डॉक्‍टर्स को दिखाया गया। मगर फिर भी वो इस बीमारी का पता नहीं लगा पाए। 
उमरा कहती हैं कि, 'जब भी मैं पेन पकड़ कर लिखने की कोशिश करती हूं, मेरी उंगलियां जवाब दे देती हैं और मैं अपनी कॉपी पर एक भी शब्‍द नहीं लिख पाती। मुझे एक शब्द लिखने के लिए दबाव डालना पड़ा। बरेली के डॉक्टरों ने मुझे दवाएं दी लेकिन इससे मेरी मदद नहीं हुई, क्योंकि उन्‍हें पता ही नहीं था कि मुझे बीमारी क्‍या है?  
इस बीमारी के वजह से में परेशान रहती है और कक्षा में नोट्स नहीं बना पाने के कारण रोती रहती। मेरे टीचर्स जो मेरी परेशानी को अच्‍छे से समझते थे, उन्‍होंने मुझे मेरे सहपाठियों के फोटोकॉपी नोट्स दिलवा कर इस मुश्किल भरे समय में मेरी मदद की। मैं उन chapters को अच्‍छे से याद करती थी। मगर असल दिक्‍कत  physics और chemistry के सब्‍जेक्‍ट में आती थी क्‍योंकि इसमें में प्रश्‍नों को सॉल्‍व नहीं कर पाती थी।
उमारा, इस बीमारी से लगातार 8 महीने तक जूझती रहीं और फैसला लिया कि वह बीच में ही स्‍कूल छोड़ देंगी। परीक्षा शुरू होने में 20 दिन ही बचे थे कि उमारा के बड़े भाई ने AIIMS, दिल्‍ली में उनका चेकअप करवाया। वहां डॉक्‍टर्स ने बताया कि उमारा को writer’s cramp नामक बीमारी है। 
परीक्षा से ठीक पहले उनका इलाज शुरू हुआ लेकिन जैसा कि उन्होंने सालभर कुछ भी नहीं लिखा, इसने परीक्षा के दौरान उनकी राइटिंग स्‍पीड कम हो गई। हालांकि, अपनी इस कमजोरी से उन्होंने अपने इरादों को बिल्‍कुल भी डगमगाने नहीं दिया। उन्‍होंने पेपर में 2-3 सवाल केवल अपनी स्‍पीड की वजह से छोड़ दिये। लेकिन जब परीक्षा का रिजल्‍ट आया, तो उन्‍होंने 86.6 प्रतिशत अंक हासिल कर के एक मिसाल कायम कर दी। 


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