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आपकी बरकत में कौन डाल रहा बाधा


डेस्क। क्या आपके घर में व्यय बढ़ रहा है? क्या खाद्य सामग्री की बरकत नहीं है? क्या मन में अस्थिरता घर कर रही है? क्या पति-पत्नी में तनाव रहता है? क्या साफ-सफाई रखने के बाद भी चींटियों-कॉकरोचों का डेरा घर में रहता है? यदि हाँ तो सारे घर के साथ एक नजर रसोई घर पर भी मार लें। यह शास्त्र सम्मत तो है ही मगर मेरा स्व अनुभव है कि हर घर में किचन आग्नेय कोण में ही होना चाहिए। चूल्हा आग्नेय में, प्लेटफॉर्म पूर्व व दक्षिण को घेरता हुआ होना चाहिए। वॉश बेसिन उत्तर में हो। भोजन बनाते समय मुख पूर्व की ओर हो, उत्तर व दक्षिण में कतई नहीं।  

उत्तर को घेरता हुआ प्लेटफॉर्म बनाना या उत्तर में गैस का चूल्हा रखना घर को महत्वपूर्ण बनाता है। ऐसे घर में काम कभी समाप्त ही नहीं होते, भोजन की बरकत समाप्त हो जाती है। गृहस्वामिनी को मानसिक क्लेश हमेशा बना रहता है। पश्चिम में बना प्लेटफॉर्म घर में अशां‍ति देता है, भोजन का रस-तत्व निष्फल करता है और स्वास्थ्‍य हानि करता है। दोनों ही स्थितियों में घर का व्यय क्रमश: बढ़ता ही जाता है और घर की शांति भंग होती जाती है।

इस संबंध में एक और तथ्य अनुभव में आया है कि छोटे-मोटे उपाय करने के बाद भी कोई विशेष सुधार होता प्रतीत नहीं होता। शरीर स्वास्थ्य व मन की शांति का सीधा संबंध भोजन से है अत: यदि रसोईघर सही दिशा में नहीं है तो वह घर आपको कभी सुख समृद्धि नहीं दे सकता।
 रसोई घर की दिशा बदलना ही एकमात्र उपाय होता है। सावधानी के लिए आग्नेय में भोजन बनाकर बाद में उसे अन्य स्थान पर रखने से भी दोष नहीं लगता।


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