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कोर्ट ने महाधिवक्ता से पूछा, विधायक की गिरफ्तारी क्यों नहीं?

NEWS DESK - उन्नावमें दुष्कर्म पीडि़ता के पिता की मौत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले तथा न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। यह सुनवाई वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी के पत्र की जनहित याचिका पर चल रही है। कोर्ट ने महाधिवक्ता से पूछा है कि विधायक की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही है। महाधिवक्ता ने इस पर दो बजे के बाद सरकार का पक्ष रखने की बात कही है। इसके पहले महाधिवक्ता ने कहा था कि विधायक पर पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दो बजे के बाद दोबारा सुनवाई शुरू हुई तो राज्य सरकार ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुये कहा कि विधायक के खिलाफ पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य नहीे है। पर्याप्त साक्ष्य होने पर कार्रवाई की जायेगी।
उन्नाव दुष्कर्म मामले में कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा विधायक को अरेस्ट करना चाहते है या नहीं। 11 अप्रैल 2018 को विधायक पर रेप की एफआईआर दर्ज। एसआईटी अधिकारी ने कहा करेंगे गिरफ्तारी। महाधिवक्ता ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी कार्यवाई। चीफ जस्टिस डीबी भोंसले व जस्टिस सुनीत कुमार कर रहे सुनवाई। कोर्ट ने कहा कि 4 जून 2017 को विधायक पर रेप का आरोप। एसआईटी की रिपोर्ट पर दर्ज की गयी 11 अप्रैल 2018 को एफआईआर। 11 जून 2017 को बहला कर ले गए तीन लोगों ने किया दुष्कर्म। तीनों गिरफ्तार। चार्जसीट दाखिल। नई एफआईआर की जांच सीबीआई को सौंपने की राज्य सरकार ने की है संस्तुति।
महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने कहा कि 20 जून 2017 को माँ ने दर्ज कराई थी एफआईआर। बहला फुसला कर तीन लोगों पर भगा ले जाने का आरोप लगाया था। तीनों के खिलाफ है चार्जसीट। बृजेश यादव अवधेश तिवारी व शिवम गिरफ्तार हुए। जमानत पर हैं। 17 अगस्त 2017 को लड़की ने पहली बार विधायक के खिलाफ मुख्यमंत्री से की शिकायत।लगाया आरोप 4 जून को हुआ था दुष्कर्म। अभी हाईकोर्ट में बहस चल रही है।

उन्नाव सामूहिक दुष्कर्म मामले में सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल इलाहाबाद हाईकोर्ट में रखेंगे पक्ष यूपी सरकार ने कोर्ट में कहा एडवोकेट जनरल अब हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा पेश करेंगे। चीफ जस्टिस डीबी भोंसले और जस्टिस सुनीत कुमार की डिवीजन बेंच इस  मामले की  सुनवाई कर रही है।

उन्नाव सामूहिक दुष्कर्म मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज होने वाली सुनवाई दोपहर 12 बजे तक के लिए टल गई थी जो कि सुबह सवा दस बजे से होनी थी।  यूपी सरकार की अपील पर दोपहर 12 बजे तक टली सुनवाई। 
इस मामले में कोर्ट में आज महाधिवक्ता या अपर महाधिवक्ता को सरकार का पक्ष रखने का समय दिया था जिसपर सुनवाई जारी है। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी को न्याय मित्र के रूप में सहयोग करने को कहा है। कल वरिष्ठ अधिवक्ता के पत्र पर बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि शव जलाया न गया हो तो अंतिम संस्कार को रोका जाए लेकिन शव का अंतिम संस्कार 10 अप्रैल को ही हो चुका था। वरिष्ठ अधिवक्ता ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर उन्नाव में लड़की से दुष्कर्म और उसके पिता की मौत को स्वतरू संज्ञान लेने व मानीटर करने की मांग की है। 
पीडि़ता के पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई जिसमें विधायक कुलदीप सिंह के नामजद हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। जबकि उल्टे कार्रवाई करते हुए पीडि़ता के पिता को ही गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि पीडि़ता के पिता को विधायक के भाई अतुल सिंह आदि ने मारपीटा भी था। गंभीर चोटों के कारण पिता की मौत हो गयी थी। पोस्टमार्टम में उसके शरीर के भीतरी और बाहरी हिस्से में 14 चोटें पायी गयी। दबाव पडऩे पर पुलिस ने विधायक के भाई अतुल सिंह को गिरफ्तार कर लिया था।
कोर्ट ने कहा कि यह समझ से परे है कि अभियुक्तों को गिरफ्तार न कर पुलिस ने पीडि़ता के पिता को क्यों गिरफ्तार किया। कोर्ट ने अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय को इसकी जानकारी महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता को देने को कहा है।

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