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लहराता रहा तिरंगा, देखती रही दुनिया: इन दो खेलों में भारत ने गजब कर दिया, ये हैं आंकड़े


-पहले लगा डोपिंग का आरोप फिर हुआ कुछ ऐसा कि छा गया तिरंगा -
डेस्क। 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने दसवें दिन बीते शनिवार पदकों की झड़ी लगा दी। जैसे-जैसे घंटे आगे बढ़े, वैसे-वैसे सफलता कदम चूमती रही। पदकों का रंग बदलता रहा लेकिन तिरंगा हर मेडल सेरेमनी में ऊपर जाता जरूर नजर आया। भारत ने गोल्ड कोस्ट (ऑस्ट्रेलिया) में चल रहे तमा
म खेलों में अपना दम दिखाया है लेकिन दो खेल ऐसे रहे हैं जहां कुछ बेहद दिलचस्प देखने को मिला। ये ऐसे आंकड़े हैं जो वाकई आने वाले समय में ओलंपिक जैसे बड़े इवेंट में भारत को गर्व से सीना चैड़ा करने का मौका देंगे।
हम यहां बात कर रहे हैं कुश्ती और मुक्केबाजी की। इन दो खेलों के जो आंकड़े हम आपको दिखाने जा रहे हैं उनके पीछे काफी कड़ी मेहनत और सालों का संघर्ष छुपा है। कुछ दिग्गजों ने तिरंगे का मान रखा तो कुछ युवाओं ने देश की शान बढ़ाई। दोनों ही खेलों में ताकत और तकनीक का मिश्रण अहम है और इन दोनों ही क्षेत्रों मं भारत के पहलवान और मुक्केबाजों ने कुछ ऐसा किया कि दुनिया निहारती रह गई।
- कुश्ती के हैरान करने वाले आंकड़े
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 के लिए ऑस्ट्रेलिया 12 पहलवानों को भेजा था। इनमें से 6 महिला पहलवान थीं जबकि 6 पुरुष पहलवान थे। दिलचस्प बात ये रही कि कोई भी खाली हाथ भारत नहीं लौट रहा। सभी भारतीय पहलवानों ने मेडल जीते हैं और देश का नाम रोशन किया है। आपको बता दें कि जब 2010 में दिल्ली ने कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की थी और उस समय जब हमने 101 पदक जीते थे, तब भी ये मुमकिन नहीं हुआ था। ऑस्ट्रेलिया जाकर धमाल मचाने वाले पहलवानों की ये है पूरी लिस्ट..
1. सुमित मलिक (मेन्स फ्रीस्टाइल 125 किग्रा) - गोल्ड मेडल
2. विनेश फोगाट (वुमेन फ्रीस्टाइल 50 किग्रा) - गोल्ड मेडल
3. राहुल अवारे (मेन्स फ्रीस्टाइल 57 किग्रा) - गोल्ड मेडल
4. बजरंग पूनिया (मेन्स फ्रीस्टाइल 65 किग्रा) - गोल्ड मेडल
5. सुशील कुमार (मेन्स फ्रीस्टाइल 74 किग्रा) - गोल्ड मेडल
6. पूजा ढांढा (वुमेन फ्रीस्ट्राइल 57 किग्रा) - सिल्वर मेडल
7. मौसम खत्री (मेन्स फ्रीस्टाइल 97 किग्रा) - सिल्वर मेडल
8. बबीता कुमारी (वुमेन फ्रीस्टाइल 53 किग्रा) - सिल्वर मेडल
9. सोमवीर कादियान (मेन्स फ्रीस्टाइल 86 किग्रा) - कांस्य पदक
10. किरन (वुमेन फ्रीस्टाइल 76 किग्रा) - कांस्य पदक
11. दिव्या काकरान (वुमेन फ्रीस्टाइल 68 किग्रा) - कांस्य पदक
12. साक्षी मलिक (वुमेन फ्रीस्टाइल 62 किग्रा) - कांस्य पदक
- मुक्केबाजों पर लगा था डोपिंग का आरोप, और फिर....
भारतीय मुक्केबाज जब गोल्ड कोस्ट पहुंचे थे तो जाते ही उन्हें एक विवाद का सामना करना पड़ा था। गोल्ड कोस्ट खेल गांव जहां खिलाड़ी ठहरे थे, वहां भारतीय मुक्केबाजी टीम के आवासीय परिसर के बाहर कुछ सीरिंज (सुई) मिली थीं जिसके बाद भारतीय मुक्केबाजों पर डोपिंग के आरोप लगने लगे। जांच हुई तो पता चला कि वे सीरिंज एक डॉक्टर द्वारा चिकित्सा के लिए इस्तेमाल की गई थीं जिसके बाद उन्हें सही जगह पर फेंका नहीं गया था। जाहिर तौर पर भारतीय मुक्केबाजों, खासतौर पर पुरुष मुक्केबाजों को उन पलों में काफी अपमान झेलना पड़ा होगा लेकिन इन मुक्केबाजों ने रिंग में उतरकर दुनिया को दिखा दिया कि उनमें कितना दम है....भारत की तरफ से बॉक्सिंग में 12 मुक्केबाज ऑस्ट्रेलिया गए थे जिनमें से 9 मुक्केबाजों ने पदक हासिल किए। दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भी ऐसा मुमकिन नहीं हुआ था। दिलचस्प बात ये रही कि 6 भारतीय पुरुष मुक्केबाजों में कोई भी खाली हाथ नहीं लौट रहा है। ये है पूरी लिस्ट--
1. एमसी मैरी कॉम (48 किग्रा) - गोल्ड मेडल
2. गोरव सोलंकी (52 किग्रा) - गोल्ड मेडल
3. विकास कृष्णन (75 किग्रा) - गोल्ड मेडल
4. अमित पंघल (49 किग्रा) - सिल्वर मेडल
5. मनीष कौशिक (60 किग्रा) - सिल्वर मेडल   
6. सतीश कुमार (91 किग्रा) - सिल्वर मेडल
7. मोहम्मद हुसामुद्दीन (56 किग्रा) - ब्रॉन्ज मेडल
8. मनोज कुमार (69 किग्रा) - ब्रॉन्ज मेडल
9. नमन तंवर (91 किग्रा) - ब्रॉन्ज मेडल
बैडमिंटन में भी भारत किसी भी सूरत मे नहीं रहा पीछे------
सात्विक-चिराग
पुरुष युगल में सात्विक-चिराग की जोड़ी ने रजत पदक जीतकर इतिहास ही रच डाला। कोर्ट में उतरे युगल खिलाड़ियों के प्रदर्शन के दौरान स्पष्ट लग रहा था कि वे नया इतिहास ही रचने आए है। हालांकि खिलाडियों के चेहरे की भंगिमा साफ जता रही थी कि वे अभी भी संतुष्ट नहीं थे। 
बैडमिंटन पुरुष युगल फाइनल में हार के साथ ही गोल्डकोस्ट में भारतीय अभियान का अंत सिल्वर मेडल के साथ हुआ। 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत ने 26 स्वर्ण, 20 रजतऔर 20 कांस्य सहित कुल 66 पदक जीते। यह भारत का इन खेलों में तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
आखिरी पदक की दावेदारी बैडमिंटन के युगल मुकाबले में सात्विक रंकी रेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने पेश की। फाइनल मैच में भारतीय जोडी को मार्कस एलिस और क्रिस लैंग्रिज को जोड़ी ने सीधे गेम में 21-13,21-16 से मात देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। चिराग और सात्विक की जोड़ी को स्वर्ण पदक मैच में 38 मिनट के भीतर इंग्लैंड की जोड़ी ने मात दी। पहले गेम में सात्विक और चिराग की जोड़ी शुरुआत से ही पिछड़ गई। पहले गेम के ब्रेक में इंग्लैंड की जोड़ी 11-7 से आगे हो गई। इसके बाद दूसरे हाफ में भारतीय जोड़ी ने वापसी कर स्कोर 14-10 तक पहुंचाया। लेकिन भारतीय जोड़ी दूसरे हाफ में भी वापसी नहीं कर सकी और पहला गेम 21-13 से गंवा दिया।
इसके बाद दूसरे गेम में भी इंग्लैंड ने अपना दबदबा बरकरार रखते हुए भारतीय युवा जोड़ी को मौका नहीं दिया और ब्रेक तक 11-6 से बढ़त बना ली। लेकिन इसके बाद भारतीय जोड़ी ने स्कोर 12-10 तक पहुंचा दिया। लेकिन अंत में इंग्लैंड की जोड़ी ने अनुभव का फायदा उठाते हुए 21-16 से दूसरा गेम भी अपने नाम कर लिया। इस जोड़ी ने रजत पदक हासिल कर इतिहास रचा है। चिराग और सात्विक की जोड़ी राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुष युगल स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली जोड़ी बन गई है।
कुल पदकों के लिहाज से भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में ये तीसरा सबसे सफल प्रदर्शन है। भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में सबसे सफल प्रदर्शन साल 2010 में किया था। इसमें भारत ने 38 स्वर्ण पदकों के साथ कुल 101 पदक जीते थे। वहीं भारत ने साल 2002 में मैनचेस्टर में आयोजित खेलों में 30 स्वर्ण पदक सहित कुल 69 पदक जीते थे। गोल्डकोस्ट में भारत ने अब तक का तीसरा सबसे सफल प्रदर्शन करते हुए 26 गोल्ड के साथ कुल 66 पदक जीते हैं। 
इन खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत ने 26 स्वर्ण, 20 रजतऔर 20 कांस्य सहित कुल 66 पदक जीते। गोल्डकोस्ट में भारत के लिए सबसे ज्यादा 16 पदक निशानेबाजों ने जीते जिसमें 7 गोल्ड, 4 सिल्वर और 4 कांस्य पदक जीते। भारत पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बाद तीसरे स्थान पर रहा। 
इससे पहले भारतीय दल ने गोल्डकोस्ट खेलों के आखिरी दिन बैडमिंटन में 1 स्वर्ण और दो रजत पदक अपने नाम किए। महिला एकल के ऑल इंडिया फाइनल मुकाबले में साइना ने पीवी सिंधू को मात देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।  वहीं सिंधू को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं पुरुष एकल में किदांबी श्रीकांत को मलेशिया के ली चोंग वी के सामने हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही उनका स्वर्ण पदक जीतने का सपना टूट गया। 
भारत ने गोल्डकोस्ट में बैडमिंटन में दो स्वर्ण, तीन रजत और 1 कांस्य पदक सहित कुल पांच पदक जीते। मिक्स्ड टीम इवेंट में भारत ने मलेशिया को मात देकर स्वर्ण पदक जीता था। यह बैडमिंटन में भारत का अबतक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
सात्विक और चिराग 
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 के लिए ऑस्ट्रेलिया के लिए अपना अब तक का सबसे बड़ा दल यहां भेजा था। भारतीय फैंस को उम्मीद थी कि गोल्ड कोस्ट में तिरंगा लहराएगा और हुआ भी कुछ वैसा ही, खासतौर पर इन दो खेलों में कमाल हो गया।

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