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टेलीकॉम विभाग की देयता के चलते अटक सकता है Idea और Vodafone का विलय




डेस्क। आइडिया और वोडाफोन का विलय जून अंत तक पूरा होगा। इस विलय से पहले दोनों कंपनियों को टेलीकॉम विभाग को करीब 18,870 करोड़ रुपए (3 अरब डॉलर) देने होंगे। ये रकम बची हुई लाइसेंस फीस, स्पेक्ट्रम उपयोग करने का चार्ज और एक बार का स्पेक्ट्रम चार्ज के तौर पर देनी होगी। मामले की जानकारी रखने वाले 3 सूत्रों ने ये बताया कि विलय तभी पूरा होगा जब ये शर्तें पूरी होंगी। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक वोडाफोन की लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम का 5,532 करोड़ बकाया है। इसके अलावा एक बार की 3600 करोड़ रुपए की स्पेक्ट्रम फीस भी बाकि है।
आइडिया की करीब 7,625 करोड़ रुपए के स्पेक्ट्रम के चार्ज और 2,133 करोड़ की एक बार की स्पेक्ट्रम की फीस बाकी है। दोनों में से एक कंपनी के अधिकारी ने कहा कि सरकार आइडिया या वोडाफोन पर लाइसेंस फीस देने का दबाव नहीं बना सकती है। ये मामला कोर्ट में हो और पिछले एक दशक से विवादित है। हालांकि टेलीकॉम विभाग के अधिकारी का कहना है कि विभाग जल्द ही कंपनियों को 19,000 करोड़ की मांग का नोटिस भेजेगा।
अगर लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज को कानूनी चुनौती दा जाती है तो विभाग 5,713 करोड़ रुपए के वन टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज की ग्यारंटी मांग सकता है। वन टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज का मामला भी कोर्ट में है। टेलीकॉम कंपनियां अपनी आय का (एडजस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू) का करीब 8 फीसदी सरकार क लाइसेंस फीस के तौर पर देती है। एजीआर का 5 फीसदी स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के तौर पर दिया जाता है।
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DoT के वरिष्ठ अधिकारी ने ईटी को बताया कि आइडिया कंपनी में 100 फीसदी FDI की मंजूरी मांग रही है। दोनों कंपनियों की तरफ से वो बची हुई रकम को लेकर बातचीत कर रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुमार मंगलम बिड़ला की कंपनी विलय के बाद अपना लाइसेंस जारी रखेगी। इस खबर पर दोनों कंपनियों ने कोई जवाब नहीं दिया है। हाल ही में TDSAT ने टेलीकॉम विभाग से भारती एयरटेल और टेलीनॉर के विलय को बिना बैंक ग्यारंटी के मंजूरी देने के लिए कहा था। 
भारत में वोडाफोन 2 नंबर पर है और आइडिया तीसरे नंबर की टेलीकॉम कंपनी है। दोनों के विलय के बाद 41 करोड़ ग्राहकों की कंपनी बनेगी जिसका भारत के 42 टेलीकॉम बाजार पर कब्जा होगा। दोनों कंपनियों को जियो कड़ी टक्कर दे रही है।

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