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दलित किशोरी ने हारी मौत से जंग

-पुलिस कर्मियों के रक्तदान के बाद भी चिकित्सक नहीं बचा सके जान
मृतका रजनी 
उन्नाव। नवरात्र के पहले दिन मंदिर से दर्शन कर घर लौट रही दलित किशोरी पर मोहल्ले के ही युवक ने चाकू से हमला बोल दिया। गर्दन और शरीर के कई हिस्सों में चाकू से 16 वार कर घायल कर दिया। किशोरी को उपचार के लिए सीएचसी ले जाया गया। जहाॅ उसकी हालत नाजुक देख उपचार के लिए लखनऊ के ट्रामा सेंटर में ले जाया गया। जहाॅ रक्तसृाव अधिक होने से उसकी हालत नाजुक देख चिकित्सकों ने शरीर में ख्ूान की कमी देख जान बचाने के लिए प्रयासरत चिकित्सकों ने खून की मांग की। जिस पर कोतवाली बाॅगरमउ व पुलिस लाइन मे तैनात कई कर्मियो का ब्लड ग्रुप मिलान के बाद किशोरी को पुलिस कर्मियों ने अपना खुन भी दिया। किंतु पुलिस कर्मियों द्वारा किया रक्तदान भी काम न आया। देर रात जिंदगी और मौत से कई घटे लड़ने के बाद उसकी मौत हो गई। 
बताते चले गत रविवार की सुबह बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के फतेहपुर खालसा गांव रहने वाले रामबली रैदास की 18 वर्षीय पुत्री रजनी रविवार सुबह साढ़े आठ बजे करीब गांव के ही मंदिर में पूजा करने निकली। उसके साथ परिवार की दो लड़कियां रिंकी 15 और मीनू10 भी थी। करीब आधा घंटा बाद किशोरी मंदिर से पूजा कर घर को निकली। करीब 20 मीटर दूरी पर पहले से छिपकर बैठे मोहल्ले के अर्जुन पुत्र रामशंकर ने उस पर चाकू से हमला कर दिया। गर्दन समेत शरीर के कई हिस्सों पर उसने चाकू से सोलह वार किए। जिससे दलित किशोरी लहूलुहान को मौके पर ही बेहोश हो गई। परिजनों ने पुलिस की मदद से घायल रजनी को सीएचसी में भर्ती कराया। कोतवाल बांगरमऊ अरुण कुमार द्विवेदी को घायल दलित किशोरी ने बताया कि मोहल्ले के अर्जुन ने उस पर चाकू से हमला किया, जबकि अजयपाल पुत्र सोबरन दूर खड़ा रहा। उधर डॉक्टर ने रजनी की हालत गंभीर देख ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। पीड़िता की मां नन्हक्की ने आरोपी अर्जुन और अजयपाल के विरुद्ध जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कराया है। उधर पुलिस ने जब घायल दलित किशोरी और उसके परिजनों से घटना के कारणाों की जानकारी लेनी चाही तो सभी चुप्पी साधे रहे। इंस्पेक्टर अरुण कुमार द्विवेदी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।



सिपाहियों का रक्तदान भी न आया काम
किशोरी की जान बचाने के लिए जब ट्रामा सेंटर के चिकित्सकों ने रक्त की मांग की। जिसके बाद रक्त को लेकर किशोरी के परिजनों में खलबली मच गई। ऐसे समय में कोतवाली बाॅगरमऊ के कर्मठ सिपाहियों ने खुद को आगे कर एक नजीर पेश की। सिपाही प्रमोद, तरुण व रानावत ने ब्लड सैंपल मैच कर जाने के बाद किशोरी को अपना रक्त दिया। इसके बावजूद भी चिकित्सक किशोरी की जाॅन नहीं बचा सके। इसका मलाल सिपाहियो के चेहरों पर साफ साफ देखा जा सकता था। 
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