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जनप्रतिनिधि निकला मास्टर मांइड

आयोजकों में रामस्वरूप उसकी पत्नी शिवरानी और ठाकुर जसवंत सिंह को आई चोटें
उन्नाव। हयात नगर में शुक्रवार सुबह भीम और बुद्ध कथा के दौरान हुए बवाल में सियासी खुन्नस को जातीय रंग देने की कोशिश की गई। अब तक की जांच में सामने आया है कि सामान्य विवाद को साजिशन उग्र रूप देने के लिए मूर्ति को गिराया गया। यह सब एक जनप्रतिनिधि के उकसाने पर हुआ। वंही पर श्रोताओं में सवर्णो ने बुद्ध कथा को लेकर कोई आपत्ति न लगा दबंगों पर ही सवाल खड़े कर दिए।  पुलिस आरोपितों के साथ मामले को तूल देने वाले पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। गांव में दूसरे दिन भी फोर्स तैनात रहा।
बौद्ध समिति ने प्रशासन की अनुमति से 12 मार्च को हयातनगर में बुद्ध और भीम कथा का आयोजन किया था। चौथे दिन शुक्रवार को गांव के कृष्णपाल, महिपाल, अतुल कुमार, समेत करीब दर्जन भर लोगों ने कथा बंद करने की बात कही। आयोजक मंडल के साथ कथास्थल पर मौजूद लोगों ने इसका विरोध किया तो दबंगों ने लाठी-डंडों से उन पर हमला बोल दिया। जिसमें रामस्वरूप उसकी पत्नी शिवरानी और जसवंत सिंह को चोटें आईं। घटना को अंजाम दे आरोपित भाग निकले। बताते हैं कि मारपीट के दौरान एक जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए और उन्होंने भीड़ को उकसा दिया, जिससे मामले को दूसरा रूप देने के लिए मूर्ति को गिराकर हंगामा हुआ। पुलिस मौके पर पहुंची तो आरोपितों द्वारा मारपीट, तोड़फोड़ और मूर्ति गिराने की बात पुलिस से कही गई। जसवंत की तहरीर पर पुलिस ने अतुल, कृष्णपाल, महिपाल, दिनेश पाल, रंजीत, संजीत और 12 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास शुरू किए। मामले की जांच कर रहे सीओ अंबरीश भदौरिया ने घटना के सभी पहलुओं को गंभीरता से लिया। पुलिस की शुरुआती जांच में सियासी खुन्नस को जातीय रंग देने की बात सामने आ रही है। गांव में भी इस बात की चर्चा है कि जिला पंचायत चुनाव में आरोपित पक्ष द्वारा एक जनप्रतिनिधि का विरोध किया गया था।  एसपी पुष्पांजलि ने बताया मामला पूरी तरह सामान्य है। फोर्स को तैनात किया गया है। सियासी खुन्नस के साथ अन्य सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सत्तावान विधायक बांगरमऊ कुलदीप सिंह सेंगर ने प्रेस क्लब के एक आयोजन में मीडिया घेरने का प्रयास करते हुए कहा की मीडिया को मामूली बात को तूल नहीं देना चाहिए था। वहीं  जैसे जैसे मास्टर माइंड का नाम खुल कर सामने आने लगा है उससे एक गहरी साजिश की बू आ रही है गौरतलब हो बुद्ध और भीम कथा को लेकर विरोध के श्वर पहली बार सुनाने को मिले, मामला तब और गंभीर हो जाता है जब जन प्रतिनिधि ही जनता की जान के दुश्मन बन जायँ।

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