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राष्ट्रपति से शिलान्यास करा निर्माणाधीन मॉडल रोका

कानपुर। जिस योजना का शिलान्यास राष्ट्रपति से करवाया। काम शुरू हुआ, फिर लाखो खर्च के बाद अब अधिकारियों को मॉडल में ही खोट नजर आने लगा है। जिससे  सरकारी योजनाओं और जनता के धन के प्रति अधिकारियों की लापरवाही देखने को मिली। गाव ईश्वरीगंज में सॉलिड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट सेंटर का शिलान्यास राष्ट्रपति से करवा, काम शुरू हुआ, ग्राम पंचायत ने लाखों रुपया खर्च भी कर दिये। मगर, अब अधिकारियों ने यह कहकर बजट रोक दिया कि मॉडल बदला जाएगा। 
कल्याणपुर ब्लॉक का ईश्वरीगंज गाव जिले में सबसे पहले खुले में शौचमुक्त हुआ। इस उपलब्धि की वजह से ही 15 सितंबर 2017 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस गाव में आए। यहीं से उन्होंने देशव्यापी अभियान स्वच्छता ही सेवा है का शुभारंभ किया था। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत पंचायती राज विभाग की योजना यह भी थी कि गंगा किनारे के ओडीएफ गावों में एसएलआरएम सेंटर बनाए जाएंगे। लिहाजा, तय हुआ कि पहले ओडीएफ गाव ईश्वरीगंज में भी बनारस की तर्ज पर एसएलआरएम सेंटर बनाया जाए। इस सेंटर के प्रति उस वक्त गंभीरता नजर आ रही थी कि जब जमीन को लेकर मामला फंसा तो जमीन का कुछ हिस्सा तो ग्राम प्रधान आकाश वर्मा ने दान किया। 15 सितंबर को राष्ट्रपति ने प्रोजेक्ट का शिलान्यास भी कर दिया।
इसके बाद विभाग ने काम शुरू करा दिया। ग्राम पंचायत को विभाग से पाच लाख रुपये मिले, लेकिन काम को न रोकते हुए वहा लगभग 11 लाख रुपये खर्च का 75 फीसद काम पूरा कर दिया गया है। अब विभागीय अधिकारियों ने पंचायत से कह दिया है कि इस प्रोजेक्ट के लिए पैसा नहीं मिलेगा, क्योंकि इसका मॉडल बदला जाएगा। सवाल उठता है कि अब तक जो पैसा खर्च हो चुका है, उसकी भरपाई कौन करेगा? यदि मॉडल बदलना ही था तो राष्ट्रपति जैसी शख्सियत से उसका शिलान्यास क्यों कराया गया?
यह है एसएलआरएम सेंटर
सॉलिड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट सेंटर के जरिये गावों का कूड़ा प्रबंधन होना है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन होगा। रीसाइकलिंग करने योग्य कूड़ा को संबंधित इकाइयों को बेच दिया जाएगा, जबकि शेष कूड़े का सेग्रीगेशन कर उसकी प्रोसेसिंग से खाद आदि बनाया जाएगा। वहा गोबर गैस प्लाट भी लगाया जा सकता है। यहा जो उत्पाद बनेंगे, उनकी बिक्री की जाएगी। खास बात है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में कूड़ा कलेक्शन से लेकर प्लाट में करने में महिलाओं को ही रोजगार दिया जाना है।

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