लोकसभा-2019

अमित शाह के चुनावी क्षेत्र में एक ऐसा क्षेत्र जहॉ के बांशिदों को मान लिया गया अछूत, आखिर क्यों! पढ़िए विशेष रिपोर्ट…

डेस्क। एक तरफ कांग्रेस समझती है कि हम उसके घर की खेती हैं जबकि बीजेपी हमारी उपेक्षा करती है। हम चक्की में पिस रहे है।.“ यह कहना है जुहापुरा के रहने वाले आसिफ़ ख़ान पठान का। इस बार भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह गुजरात की गांधीनगर सीट से बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर उतरे है। जिसके बाद अहमदाबाद से पश्चिम में मौजूद जुहापुरा क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बात भौगोलिक की करें तो लगभग पांच वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला जुहापुरा क़रीब पांच लाख लोगों का ठिकाना है जिनमें से अधिकांश मुसलमान हैं। ये इलाक़ा पहले सरखेज विधानसभा सीट के अंतर्गत आता था। जहां से अमित शाह रिकॉर्ड बहुमत के साथ जीतते रहे थे। अब ये वेजलपुर विधानसभा क्षेत्र में और गांधीनगर लोकसभा सीट के तहत आता है। बताते चले कि गुजरात में हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक दंगों के बाद बड़ी तादाद में मुसलमान परिवारों ने सुरक्षा की चाहत में जुहापुरा का रुख़ किया था। जिसके बाद उन सबने यहीं पर अपना ठिकाना बना अपनी ज़िंदगी दोबारा शुरूआत की। इनमें से कई परिवार ऐसे भी मिल जाएगें जो 2002 दंगों के बाद यहां आ कर बसे थे। इस इलाक़े से अगर आप एक बार निकलेंगे तो आसानी से ये जान लेंगे कि यहां मूलभूत सुविधाओं की कितनी कमी है।
बड़ी मुस्लिम बस्तियों में से एक है जुहापुरा
1973 में साबरमती नदी में बाढ़ आई थी, तब दो हज़ार से अधिक बेघर हिंदू और मुस्लिम परिवारों को बसाने के लिए सरकार ने अहमदाबाद शहर के पश्चिम में एक जगह दी थी। यहीं पर बसी बस्ती का नाम पड़ा- जुहापुरा। लेकिन गुजरात में 1985, 1987 और 1992 के दंगों के कारण हिंदू और मुसलमानों के बीच एक खाई पैदा हो गई। जो कम होने के बजाए बढ़ती ही चली गई। बाद में हुए 2002 के दंगों ने इस खाई को और भी गहरा कर दिया। शहर के जिन इलाक़ों में कम संख्या में मुसलमान रहते थे उन्हें सबसे ज्यादा नुक़सान उठाना पड़ा। इसलिए सुरक्षित बसेरे की चाह में मुसलमान परिवारों ने जुहापुरा का रुख़ किया। अहमदाबाद के नवरंगपुरा और पालड़ी जैसे इलाक़ों में रहने वाले शिक्षित और संपन्न मुसलमान परिवारों ने भी सुरक्षा की तलाश में जुहापुरा में ही की। इसके अलावा 2002 में अन्य ज़िलों में दंगों के शिकार हुए लोगों ने भी जुहापुरा में शरण ली और धीरे-धीरे से एक बड़े मुस्लिम घेरे में तब्दील हो गई। मानों या न मानों जुहापुरा की पहचान शहर के भीतर एक दूसरे ही शहर के रूप में की जाती है। अहमदाबाद एरिया डेवलपमेंट ऑथोरिटी के अंतर्गत आने वाले जुहापुरा को 2007 में अहमदाबाद नगरपालिका से जोड़ा गया लेकिन अब भी वहां मूलभूत सुविधाओं की कमी साफ़ दिखती है।

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