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Vykti विशेष- एक समाजवादी वटवृक्ष स्व• अनवार अहमद

जनपद की राजनीति में स्व• अनवार अहमद ‘‘बाबूजी’’ एक चमकता हुआ सितारा थे ।
श्री अनवार अहमद के राजनैतिक जीवन की यात्रा के कई वर्ष  बीत चुके हैं । इस राजनैतिक कैरियर में शायद ही कोई उच्च पद हो जो बाबूजी के नाम से अछूता रह गया हो। 

सन् 1969 और 1970 में चैधरी चरण सिंह की सरकार में बाबूजी स्वास्थ मंत्री थे ।
 1970 व 1971 में टी0एन0 सिंह के कार्यकाल में कृषि  मंत्री रहे।
 सन् 1969 से 1974 तक विधायक पद पर रहे। 

सन् 1989 से 1993 तक सांसद रहे और 2003 से 2009 तक एम0एल0सी0 पद पर रहे।
 इस समय श्री अहमद  समाजवादी पार्टी उन्नाव के जिलाध्यक्ष थे अपने अनुशासन के लिये वह सभी के लिए एक आदर्श थे ।

5 बारे मौत की नींद से बाहर आये थे।


बाबूजी अपने ऊपर घटित कुछ घटनाओं का हमेशा जिक्र किया करते थे, जिसमें उन्होने मौत को बहुत करीब से देखा था। एक बार उन्होने बताया था कि मुस्लिम धर्म में नमाज पढ़ते समय उठना मना है लेकिन अगर जान पर बन आये तो नमाज छोड़ी भी जा सकती है। ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ था। एक दफा मै मस्जिद में नमाज पढ़ रहा था और एक काला जहरीला सांप मेरे मुंह के पास आ गया। मैने आनन-फानन उस सांप को हटाया और मैं नमाज से उठ खड़ा हुआ। 
दूसरी घटना बताते हुए उन्होंने कहा मै किसी गांव में दौरे पर गया हुआ था वहां तालाब में  मै गिर गया। मै आधे से ज्यादा डूब गया था लेकिन सहकर्मियो की वजह से मेरी जान बच गयी। तीसरी घटना पर तो मुझे भी हंसी आती है  मै मोहल्ले के एक बड़े से नाले में गिर गया था वहां पर मौजूद लोगों ने मेरी जान बचायी थी। रात में काम करना था पसंदबाबूजी बताते थे कि मुझे दिन के बजाय रात में काम करना पसन्द है।


 रात में करते थे औचक निरीक्षण


श्री अहमद बताते थे कि अगर मैने दिन में कहीं औचक निरीक्षण किया तो साधारण सी बात है कि दिन के समय लोग अपने कार्य में लगे होंगे, इसीलिए मैने सभी औचक निरीक्षण रात में किये। 
जैसे अस्पताल में डाक्टरों को देखना, दवाईयों का ब्योरा लेना और यातायात से सम्बन्धित घटनाएं की जानकारी लेना आदि। 

कभी नही देते थे लोकेशन की जानकारी


श्री अहमद का कहना था कि मै कभी लोकेशन की जानकारी नही देता था कि मुझे कहाॅ आना है कहाॅ नही। मै बस अपने सहयोगी से कहता हूं गाड़ी निकालो चलना है। मेरे सुरक्षाकर्मी, सहायक और कार्यकर्ता किसी को भी मेरे लोकेशन की कोई जानकारी नही होती है। 

समय के पाबंद थे।

श्री  अहमद  बताते थे कि मै समय का बहुत पाबंद हूं। आपने देखा होगा कि ज्यादातर मंत्री समय से किसी भी कार्यक्रम या मीटिंग में  नही  पहुॅचते लेकिन मेरे साथ इसका उल्टा है, मै हमेशा समय से 2 मिनट पहले कार्यक्रम या मीटिंग में पहुॅच जाता हूॅ। जब मै मंत्री पद पर था तब चौराहे पर खड़ा सिपाही मेरी गाड़ी को देखकर अपनी घड़ी मिलाता था। 

आखिरी क्षणों को छोड़कर ताउम्र कभी रोए नहीं 


बाबूजी अक्सर कहा करते थे कि आज तक जिन्दगी  में रोया नही, उनका कहना था कि मेरे माता-पिता, भाई-बहन की मौत पर भी मैं कभी नही रोया, हार-जीत खुशी-गम के भी मौके पर मेरी आॅखों में आंसू नही आये, यह एक नेता के लिए बहुत बड़ी बात है। 

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